OMG: कभी देखी है ‘हाथों’ से चलने वाली मछली? 20 साल बाद दिखी दुर्लभ ‘हैंडफिश’

News – Umesh Nirmalkar

हाथ के सहारे चलने वाली ये हैंडफिश 20 साल बाद देखी गई है. आखिरी बार 1999 में आस्ट्रेलिया के तस्मानिया( Australia,Tasmania) में देखा गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि 120 मी. की गहराई में पिंक हैंडफिश(Pink Handfish) का मिलना किसी आश्चर्य से कम नहीं है.

समुद्री जीव-जन्तुओं में मछली का नाम कोई नया नहीं है. न ही ये कोई ऐसी जीव है जिसका मिलना किसी आश्चर्य जैसा हो. फिर भी आस्ट्रेलिया में एक ऐसी मछली देखे जाने का दावा किया जा रहा है जो तकरीबन दो दशक पहले विलुप्त हो गई थी. विशेषज्ञों ने कोशिश की लेकिन वो दोबारा कहीं नज़र नहीं आई. अब हाथ के सहारे चलने वाली ये पिंक हैंडफिश (Pink HandFish) 20 साल बाद देखी गई है.ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया यूनिवर्सिटी(University of Tasmania) के प्रोफेसर नेविल बैरेट (Neville Barret) ने दावा किया है कि पिंक हैंडफिश एक बार फिर पार्क की 120 मीटर की गहराई में देखी गई है. समंदर के भीतर एक कैमरे में वो आगे पीछे तैरती कैद हुई है. इसके पहले आखिरी बार हैंडफिश आस्ट्रेलिया के तस्मानिया ( Australia,Tasmania) में देखी गई थी.

20 साल पहले हुई थी गायब, अचानक आई सामने
2 दशक पहले विलुप्तप्राय ये मछली अचानक नज़र आई तो जीव वैज्ञानिकों ने इसे आशा की नई किरण के तौर पर देखा. ये मछली बेहद दुर्लभ प्रजातियों में से एक मानी जाती है. ये अपने पंखो की वजह से दुर्लभ मानी जाती है. इसीलिए इस तस्मानिया के ‘खतरनाक प्रजाति अधिनियम’(Tasmania’s Threatened Species Act ) के तहत दुर्लभ प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है. एक अन्य खोज के दौरान तस्मान फ्रैक्चर मरीन पार्क में डूबे कैमरे से पानी के अंदर तैरती हैंडफिश (HandFish) को देखा गया.

गुलाबी मछली में क्या है ख़ास
पिंक हैंडफिश की सबसे बड़ी ख़ासियत है उसके पंख, जो उसे अपनी प्रजाति के बाकी जीवों से अलग बनाता है. जी हां, उसके पंख जिसे वो हाथ की तरह इस्तेमाल करती है और समुद्र तट पर आने के दौरान इन्हीं पंखनुमा हाथों के सहारे चलती है. ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी पार्क्स ऑस्ट्रेलिया के जेसन मुंडी (Jason Mundy from Parks Australia) के मुताबिक पिंक हैंडफिश यहां की मूल निवासी (Origine) है और यहां की तमाम प्रजातियों में से एक है. हैंडफिश का जो नया वीडियो सामने आया है उसमें वो अपने हाथों के सहारे खुद को कभी इधर तो कभी उधर बैठाती नज़र आ रही है. ऐसा हर जीव जो विलुप्ती की कगार पर है जिसे बचाने या तलाशने में वैज्ञानिक जुटे हैं उनके लिए 20 साल बाद एक दुर्लभ मछली का देखा जाना उम्मीद की किरण लेकर आया है.

UMESH NIRMALKAR

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