केंद्रीय ग्रामीण विकास के निर्देश:खरीदी केंद्रों में 93 चबूतरे मनरेगा से बनाए बिना अनुमति निर्माण पर जवाबदेही तय होगी, बिना अनुमति निर्माण पर वसूली होगी

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मनरेगा के तहत धान खरीदी केंद्र में बनाया गया चबूतरा।

जिले में धान खरीदी केंद्रों में बने चबूतरे मनरेगा योजना की राशि से बनाए गए है जबकि यह योजना के पैरामीटर में नहीं आते। केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 अक्टूबर को आदेश जारी कर कहा है कि पैरामीटर में नहीं आने वाले कामों की जवाबदेही तय कर संबंधित अफसर पर कार्रवाई की जाए और ऐसे कामों की रिकवरी की जाए। इस मामले में जनप्रतिनिधियों ने भी नियम विरूद्ध काम की मंजूरी देने वाले अफसरों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में होने वाले काम का हिसाब किताब केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मांगा है। इस आदेश के विभागीय वेबसाइट पर जारी होने के बाद से ही हड़कंप मच गया है। वर्तमान में जिले के धान खरीदी केंद्रों में 93 चबूतरों के लिए 2-2 लाख रुपए की राशि से चबूतरे बनवाए गए हैं जबकि वे मनरेगा योजना के पैरामीटर में नहीं आते हैं। मनरेगा के अंतर्गत निर्धारित कार्य ही कराए जा सकेंगे

मनरेगा कार्यों के मापदंड

जिला स्तर पर बनने वाली कामों की सूची को अंतिम रूप ग्राम सभा से तैयार की गई सूची के प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा। कम से कम 50 फीसदी कामों का जिम्मा ग्राम पंचायतों का होगा। मशीनरी का प्रयोग इस योजना में नहीं है और किसी भी कीमत पर ठेकेदारों या श्रम विस्थापन मशीनरी का इस्तेमाल नहीं होगा। 1. जल संरक्षण

2. सूखे की रोकथाम के तहत वृक्षारोपण

3. बाढ़ नियंत्रण

4. भूमि विकास

5. विभिन्न तरह के आवास निर्माण 6. लघु सिंचाई

7. बागवानी

8. ग्रामीण सम्पर्क मार्ग निर्माण।

जिपं सीईओ ने दी सफाई

जिला पंचायत सीईओ हरीश एस ने कहा कि जिले में सभी काम पैरामीटर के दायरे में हुए हैं। ऐसे कोई काम नहीं है जो पैरामीटर में नहीं आते। मनरेगा में होने वाले कामों को पैरामीटर का ध्यान रखकर ही मंजूरी दी जाती है।

ये है आदेश

मनरेगा के डायरेक्टर धरमवीर झा ने लिखा है कि प्रोग्राम ऑफिसर यह तय करेंगे कि कौन सा काम पैरामीटर में है और कौन सा नहीं। यदि बगैर पैरामीटर के काम कराए गए हैं तो संबंधित अफसर पर क्या कार्रवाई हुई है।

जनप्रतिनिधियों ने की जांच व कार्रवाई की मांग
बिल्हा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष विक्रम सिंह ने ऐसे अफसरों के खिलाफ जांच व कार्रवाई की मांग की है। विधायक प्रतिनिधि मनोज गुप्ता ने कहा कि यदि पैरामीटर के बाहर काम किए गए हैं तो उसकी जांच होनी चाहिए। मस्तूरी से जिला पंचायत सदस्य चांदनी भारद्वाज ने कहा कि धान खरीदी केंद्र में बनाए गए चबूतरे यदि पैरामीटर में नहीं आते थे तो पर मनरेगा की राशि क्यों खर्च की गई इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
किसकी मंजूरी से हुए काम
पंचायतों के धान खरीदी केंद्र में बनाए गए चबूतरे किसकी मंजूरी से बने। दरअसल पंचायत में किसी भी निर्माण के लिए प्रस्ताव जनपद भेजा जाता है और जनपद से जिला पंचायत में भेजकर उसकी मंजूरी ली जाती है।

WORLD ONE NEWS – UMESH NIRMALKAR

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