खुदकुशी से खुला आवास घोटाला:दो मौत, 20 से ज्यादा शिकायतें, दो जांच भी, लेकिन फिर भी दबा है आवास घोटाला

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बड़ा सवाल? आखिर किसे बचा रहे नगर निगम के अफसरनगर निगम में आवास घोटाला की 20 से अधिक शिकायतें रजिस्टर हो चुकी हैं। शिकायतों की संख्या सैकड़ों में है, परंतु वह जांच में नहीं है। खबर है कि पहली जांच में नोडल अफसर सहित निगम कर्मियों को जिम्मेदार बताया गया, परंतु जांच रिपोर्ट पर आयुक्त ने कोई कार्रवाई नहीं की। साल भर में दो आयुक्त बदल चुके हैं।
पर वो सिस्टम नहीं बदला जो जांच को रोक देता है और कार्रवाई की फाइल दबा दी जाती है। बड़ा सवाल है कि आखिर कोई स्ट्रांग लॉबी नगर निगम में सक्रिय है जो आवास के नाम पर घोटाला दर घोटाला होने के बावजूद किसी पर आंच नहीं आने देती। जबकि आवास दिलाने के नाम पर वसूली और घोटाले के चक्कर में अब तक दो मौतें हो चुकी हैं। 3 जुलाई को आयुक्त अजय कुमार त्रिपाठी ने अपर आयुक्त राकेश जायसवाल, डिप्टी कमिश्नर खजांची कुम्हार, लेखाधिकारी अविनाश बापते, ईई क्रांति अशोक कुमार को आवास आबंटन में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के आदेश दिए थे, परंतु यह जांच नहीं हुई।
नोडल अधिकारी जिम्मेदार
मई 2020 में पार्षद बंशी साहू ने खुदकुशी कर ली। 10 महिलाओं ने शिकायत की थी कि उनसे 30 हजार से लेकर 60 हजार रुपए तक लिए गए। जिन्हें पक्की रसीद मिल गई, उनका आबंटन वैध तथा जिन्हें बिना रसीद या फर्जी रसीद के सहारे डबरीपारा का आईएचएसडीपी आवास रहने के लिए दिलाया गया वह अवैध। इन्हीं की शिकायत पर तत्कालीन आयुक्त प्रभाकर पांडेय ने जांच अधिकारी राकेश जायसवाल अपर आयुक्त, डिप्टी कमिश्नर खजांची कुम्हार, लेखाधिकारी अविनाश बापते को जांच के आदेश 28 जून 2020 को दिए गए और हफ्ते भर में रिपोर्ट मांगी गई। जांच रिपोर्ट दो दिन पहले ही निगम आयुक्त को सौंप दी गई। इसमें पूर्व पार्षद को ही जिम्मेदार ठहराया गया। ‘दैनिक भास्कर’ ने जांच के तौर तरीके और निष्कर्ष पर सवाल उठाते खबर प्रकाशित की तो आयुक्त ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ बिन्दु स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए और जानकारी देने कहा गया है। इसके बाद कमेटी ने दूसरी जांच की रिपोर्ट भी सौंप दी पर उस पर कार्रवाई नहीं की गई। जांच की रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय में है।
जिम्मेदार: नोडल अधिकारी पीके पंचायती का कहना है कि आईएचएसडीपी के मकान में जबरिया बेजा कब्जा करने वालों का पता नहीं चला क्योंकि मकान मेें ताला लगा रहता था। उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि टाइम कीपर, सब इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर और नोडल अधिकारी की बिना सहमति के आखिर कोई मकान में कैसे घुस सकता है? उन्होंने बताया कि अभी भी 20 आवासों में बेजा कब्जा है।
दूसरी मौत के बाद एफआईआर
अटल आवास दिलवाने के लिए सरकंडा अशोक नगर निवासी निराला गोस्वामी पिता रोशन गोस्वामी 40वर्ष ने अपने इलाके के लोगों से 16.50 लाख रुपए लिए थे। आवास नहीं मिला तो लोग उनसे पैसा मांग रहे थे। इससे वे परेशान थे। 20 अक्टूबर 2021 की सुबह आंगन में उन्होंने फांसी लगा ली। पुलिस को उसकी जेब से सुसाइड नोट मिला है। इसमें सुमन, विजय साहू व दिनेश पटेल के नाम लिखे थे। तीनों आरोपी फरार है। सिविल लाइन में दर्ज प्रकरण में जरूर दो लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
पहली ही जांच में शक की सुई नोडल पर
जांच अधिकारी अपर आयुक्त राकेश जायसवाल ने जांच के निष्कर्ष के बारे में गोपनीयता का हवाला दिया परंतु इतना जरूर संकेत दिया कि उनकी रिपोर्ट में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। कार्रवाई का अधिकार उनका नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच रिपोर्ट की फाइल आयुक्त कार्यालय से नहीं लौटी। इधर सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में नोडल अधिकारी, असिस्टेंट इंजीनियर, सब इंजीनियर और टाइम कीपर को मकान में बेजा कब्जा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

NEWS – UMESH NIRMALKAR

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