गांजे की बेखौफ तस्करी:कार में महिला और बच्चों को देख सोचा फैमिली कर रही यात्रा, डिक्की चेक की तो मिला 57 किलाे गांजा

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ओडिशा बॉर्डर पर लवाकेरा बैरियर में बुधवार की तड़के पुलिस की टीम ने वाहनों की जांच के दौरान एक कार से 57 किलो गांजा बरामद किया है। इस कार में दो पुरुष, एक महिला व दो बच्चे बैठे थे। बैरियर पर जब पुलिस ने कार रुकवाई तो वाहन में महिला व बच्चों काे देखकर पुलिस ने सोचा यह फैमिली कार है। पुलिस ने इस वाहन की भी बारीकी से जांच की तो कार की डिक्की में स्टेपनी रखने वाली जगह पर गांजे के पैकेट्स मिले।

पुलिस ने इस कार से गांजे के 6 बड़े पैकेट्स बरामद किए हैं। पैकेट्स में 57 किलो गांजा मिला है, जिसकी कीमत 5 लाख 70 हजार रुपए आंकी गई है। मामले में पुलिस ने एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बुधवार की तड़के तीन बजे एक स्कोडा कार क्रमांक यूपी 16 सीसी 1503 बैरियर पर पहुंची। पुलिस ने इस कार को रूकवाकर जांच शुरू की।

इस कार में एक महिला सहित तीन लोग व दो बच्चे सवार थे। पुलिस ने कार की डिक्की की तलाशी ली तो इसमें 57 किलो गांजा मिला ताे उन्हें गिरफ्तार करते हुए कार व गांजा जब्त कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में मोहन लाल 38 साल निवासी बिसहिजनकला थाना भेजा, राजन विश्वकर्मा 27 साल निवासी कोटहां थाना भेजा और ज्योति विश्वकर्मा उम्र 22 वर्ष निवासी कोटहां सभी जिला प्रयागराज उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।

पुलिस को शक ना हो इसलिए बच्चों को भी कार में बैठाया
गांजा तस्कर अब गांजा तस्करी के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं। पकड़े गए वाहन में गांजा तस्करों ने महिला व बच्चों को भी साथ रखा था। यह इसलिए किया था ताकि पुलिस को लगे की यह फैमिली कार है और चेकिंग कर ज्यादा परेशान ना किया जाए, पर जशपुर एसपी ने ओडिशा से प्रवेश करने वाली सभी गाड़ियों की बारीकी से जांच के निर्देश दिए हैं।

इसलिए इस वाहन की भी जांच हुई और तस्कर पकड़ में आ गए। पत्थलगांव हिट एंड रन केस में पकड़े गए गांजा तस्करों के सरगना को कुछ दिन पहले ही पुलिस मप्र के सिंगरौली से गिरफ्तार कर लाई थी। इस सरगना ने बताया कि यात्री बस, ट्रेन, बुकिंग की फैमिली कार, एंबुलेंस आदि वाहनों के जरिए भी गांजा तस्करी की जाती है।

उत्तरप्रदेश ले जा रहे थे माल
पकड़े गए तीनों आरोपी ओडिशा से गांजा प्रयागराज उत्तर प्रदेश ले जा रहे थे, जहां वे इस गांजे को 4 गुना अधिक कीमत पर बेचते। आरोपियों को लवाकेरा बैरियर पर ही पकड़ लिया गया। यदि इस बैरियर को वे पार कर लेते तो जिले में दूसरे किसी भी स्थान पर जांच नहीं होती और वे आसानी से निकल सकते थे।

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