शहर की दिवाली महकेगी यहीं के फूलों से, केवल दस साल में उत्पादन दोगुना

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राजधानी के आउटर में गेंदा फूल की खेती।
  • इस बार राजधानी में नजर आ रहे ज्यादातर देशी-विदेशी फूल लोकल बाड़ियों के ही

राजधानी में पिछले एक दशक में फूलों की मांग बढ़ी है तो आउटर में बड़े पैमाने पर फूलों की खेती शुरू हो गई है। अटारी और आसपास तथा भाठागांव जैसे शहर से लगे आउटर में किसानों ने इस बार करीब 900 एकड़ खेतों में फलों के साथ फूल भी लगाए हैं। चूंकि फूलों की डिमांड सालभर रहने लगी है, इसलिए यहां किसान अब खास तरह के ग्रीन हाउस बनाकर विदेशी फूल भी उगा रहे हैं।

रायपुर में इस बार भी फूलों की बंपर पैदावार है और दिवाली में इस बार शहर में जितने भी फूल नजर आ रहे हैं, ज्यादातर लोकल बाड़ियों के हैं। त्योहार से एक दिन पहले स्थानीय चिल्हर कारोबारी लोकल बाड़ियों से ही फूल लाकर बेचने की तैयारी में हैं, अर्थात इस बार शहर में दिवाली आमतौर से यहीं के फूलों से महकने वाली है।

पिछले कुछ सालों से राजधानी में फूलों की खेती की तरफ बड़े और छोटे किसानों का रुझान बढ़ा है। त्योहार के समय फूलों की पूछपरख बढ़ जाती है। सर्दियों के मौसम में कई तरह के फूल बाजारों मंे नजर आते हैं। कैश क्रॉप होने की वजह से बड़े किसान भी परंपरागत फल-सब्जियों के साथ फूलों की खेती करने लगे हैं।

साल-दर-साल रकबा और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। रायपुर और आसपास पिछले साल 1514 टन फूल उगाए गए थे। इस बार 300 टन और बढ़ने का अनुमान है। आंकड़ों के अनुसार राजधानी और आसपास एक दशक पहले करीब फूलों का उत्पादन करीब 900 टन था, जो अब बढ़कर करीब 1800 टन हो सकता है।

किस-किस तरह के फूल
राजधानी में गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा, गुलदाउदी, ग्लेडियोलस, चमेली और गैलार्डिया आदि देशी-विदेशी फूलों की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। गेंदे के बाद सबसे ज्यादा उत्पादन ग्लेडियोलस का ही है। सिर्फ गेंदे की बात करें तो यह 15 से 20 हजार टन उगाया जा रहा है। फूलों से सजावट या अन्य उपयोग में गेंदे के फूलों को प्राथमिकता दी जा रही है। देशी ही नहीं, यहां कई तरह के विदेशी फूल भी उगाए जा रहे हैं। चूंकि विदेशी फूल ठंडे माहौल में लगते हैं और यहां का माहौल गर्म है, इसलिए बड़े किसान खेतों में बड़े डोम जैसे ग्रीन हाउस बना रहे हैं।

बढ़ गया उत्पादन
2020-21 में प्रदेश के लगभग सभी जिलों को मिलाकर कुल 13089 हेक्टेयर में 229868 टन फूलों का उत्पादन किया गया। 2019-20 में इससे ज्यादा रकबा यानी 13493 हेक्टेयर में फूलों की खेती की गई, लेकिन उत्पादन महज 76219 टन हुआ। इस तरह पिछले दो सालों में रकबा लगभग समान रहा, लेकिन उत्पादन में 153647 टन का अंतर आ गया। किसानों का कहना है कि पिछले साल कोरोना की वजह से लॉकडाउन के कारण बहुत से लोग बेरोजगार थे। फैक्ट्रियां, उद्योग-धंधे सभी बंद होने के कारण किसानों और आम लोगों ने खेतीबाड़ी की तरफ रुख किया। यही वजह है कि उत्पादन अधिक हुआ।

सालभर फूलों का उपयोग

छत्तीसगढ़ में पहले ज्यादातर फूल महाराष्ट्र, नासिक, उत्तरप्रदेश, हिमांचल प्रदेश आदि राज्यों से आते थे। मांग बढ़ी तो किसानों ने बड़े-बड़े खेतों में भी फूल लगाने शुरू कर दिए। राज्य बनने के बाद रायपुर और प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। हर राजनीतिक कार्यक्रम में अब फूलों का उपयोग होता है।

मंचों, भवनों इत्यादि की सजावट के अलावा गुलदस्ते, हार बनाने में बड़े पैमाने पर फूलों का उपयोग हो रहा है। शहर में शादियों में भी फूलों का इस्तेमाल बढ़ा है। वैवाहिक तथा अन्य समारोहों में ज्यादातर सजावट फूलों से हो रही है। बड़े शो-रूम और कार्पोरेट संस्थानों में फूलों का उपयोग बढ़ा है। इसीलिए यहां फूलों की खेती भी बड़े पैमाने पर होने लगी है।

NEWS – UMESH NIRMALKAR

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