बिलासपुर नम्बर 2 से 11 वें पायदान पर’……….. राजस्व प्रशासन का दावा

बिलासपुर— जिला राजस्व प्रशासन का दावा है कि बीते साल में जिले में तेजी के साथ लम्बित प्रकरणों का निराकरण किया गया है। इसमें रोजाना आने वाले मामले भी शामिल हैं। बिलासपुर अनुविभागीय अधिकारी पुलक भट्टाचार्य की माने तो पिछले तीन महीनों में जिले में कुल लम्बित प्रकरणो में से करीब 50 प्रतिशत प्रकरणों का  निराकरण किया गया । आरोप वेबुनियाद है कि  किसी भी प्रकरणों को बेवजह रोका जा रहा है। यदि ऐसा होता तो निराकृत प्रकरणों का आंकड़ा करीब पचास प्रतिशत नहीं होता।जबकि हर महीने आने वाले आवेदनों से दो गुना प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है।

बिलासपुर राजस्व महकमा का दावा है कि बीते साल  तीन महीनों में करीब पचास प्रतिशत लम्बित प्रकरणों का निराकरण किया गया है। तेजी से प्रकरणों के निराकरण से बिलासपुर जिले में लम्बित प्रकरणों की संख्या अब पचास प्रतिशत रह गयी है।

             बिलासपुर एस़डीएम ने बताया कि सितम्बर 2021 तक जिले  में 12184 प्रकरण लम्बित थे। अक्टूबर में 1188 नए आवेदन आए लेकिन 2156 प्रकरणों का निराकरण किया गया। नवम्बर में 1356 के मुकाबले कुल 2672 मामलों का निराकरण किया गया। दिसम्बर में 878 नए प्रकरण दर्ज हुए। लेकिन 3028 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

                      पुलक भट्टाचार्य ने दावा किया कि बीते तीन महीनों में विभाग को 3422 नए मिले। और पुराने 12184 प्रकरणों को मिलाकर लम्बित प्रकरणों की कुल संख्या 15606 थी। बीते तीन महीने में कुल 7856 प्रकरणों का निराकरण हुआ।  विभाग ने हर मिले मिले आवेदनों के मुकाबले दो गुना आवेदनों का निराकरण किया।  इस तरह तीन महीने नए और पुराने प्रकरणों को मिलाकर करीब 50 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण किया गया । बहरहाल अब लम्बित प्रकरणों की संख्या 7750 रह गयी है। 

लेकिन आमजन में आक्रोश

               एक तरफ जहां एसडीएम का दावा है कि मात्र तीन महीने में रिकार्ड तोड़ लम्बित मामलों का निराकरण किया गया है। वहीं जनता में अब भी काम नहीं होने को लेकर शिकायत कायम है। लोगों की माने तो डायवर्सन प्रकरणों को बेवजह लटकाया जा रहा है। मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करेंगे।

क्या कहते हैं एसडीएम

               एसडीएम पुलक भट्टाचार्य ने बताया कि किसी भी आवेदन को वेवजह लटकाए या रोके जाने का सवाल ही नहीं उठता है। जिस आधार पर पहले के अधिकारियों ने काम किया..उसी आधार पर आज भी काम हो रहा है। साढ़े 12 हजार वर्गफिट जमीन का पहले भी बिना रोक टोक डायवर्सन होता था। आज भी हो रहा है। पहले भी आदेश था कि डायवर्सन की गयी जमीन पर अवैध प्लाटिंग नहीं होगी। आज भी वही लिखा और पढ़ा जा रहा है।

                     लेकिन कुछ लोग  इस लिखा प़ढ़ी को गंभीरता से नहीं ले रहे है। अधिकारियों को अंधेरे में रखकर डायवर्सन के समय दिए गए निर्देशों और आदेश के खिलाफ अवैध प्लाटिंग कर रहे है। जबकि आदेश में स्पष्ट है कि डायवर्सन की गयी जमीन पर अवैध प्लाटिंग नहीं होगी। बावजूद इसके लोग ऐसा कर रहे है। शायद ऐसी ही प्रकरणों को लेकर लोगों में नाराजगी है।

क्या कहते हैं आवेदक       

              आवेदको की माने तो साढ़े 12 हजार वर्ग फिट जमीन डायवर्सन के लिए किसी प्रकार के दस्तावेज की जरूरत नहीं है। जरूरत पड़ने पर हम डायवर्टेड प्लाट का एक हिस्सा क्यों नहीं बेंच सकते हैं। अधिकारियों को ऐसा क्यों लगता है कि हम अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं । हमारी जरूरत भी तो हो सकती है। किसी को लड़की की शादी करना है तो तो किसी को बच्चों की पढ़ाई का खर्चा देना है। सिर्फ इसलिए छोटे प्लाट का डायवर्सन रोक दिया जाए कि हम अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं। ऐसा सोचना गलत है।                            

कोई नहीं चाहता टॉप में स्थान

               बहरहाल बीते साल में खुशी और नाराजगी के बीच जिला राजस्व प्रशासन ने तेजी के साथ लम्बित प्रकरणों का निराकरण किया है। कई सालों से लम्बित प्रकरणों को लेकर जहां रायपुर जिला नम्बर एक तो बिलासपुर जिला नम्बर दो पर काबिज रहा है। 2021 साल बीतने के साथ रायपुर जिला आज भी लम्बित प्रकरणों की सूची में नम्बर एक पर काबिज है ।जबकि बिलासपुर जिला फिसलकर 11 वें पायदान पर चला गया है। यानि प्रकरणो का निराकरण तेजी से किया गया है। राजस्व महकमा की माने तो जल्द ही बिलासपुर जिले के लम्बित प्रकरणों को न्यूनतम स्तर तक ले जाएंगे। क्योंकि प्रदेश सरकार की एक मात्र सूची है जिसमें कोई भी जिला टाप नम्बर में नाम नहीं देखना चाहता है।

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