राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ की बहनों ने विधि-विधान से की हलषष्ठी पूजा संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ निभाई धार्मिक परंपरा
बिलासपुर। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ जिला बिलासपुर की महिलाओं ने हलषष्ठी व्रत (हरछठ/खमर छठ) के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समाज की महिलाओं ने अपने-अपने आसपास की विभिन्न संगठनों की महिलाओं के साथ मिलकर श्रद्धा और आस्था के साथ हलषष्ठी माता की पूजा की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हलषष्ठी व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए रखती हैं। इस दिन को भगवान श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। पूजा-अर्चना के पश्चात माताओं ने अपनी संतानों को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य और लंबी आयु की कामना की। इस अवसर पर अर्चना तिवारी, मीनू दुबे, शशि प्रभा पांडे, प्रतिभा पांडे, लता दुबे सहित समाज की अनेक बहनें उपस्थित रहीं। महिलाओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न की और व्रत की धार्मिक मान्यताओं का पालन किया। हलषष्ठी पूजा में बिना जुते हुए खेत की उपज से तैयार पसहर चावल, महुआ तथा भैंस के दूध, दही और घी से बनी सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गौ माता के दूध का उपयोग नहीं किया जाता, क्योंकि गौ माता अपने बछड़े के लिए दूध रखती हैं। पूजा में महुआ की दातून, पत्तल-दोना सहित अन्य पारंपरिक सामग्रियों का भी विशेष महत्व रहता है। कुछ स्थानों पर वंशवृद्धि और समृद्धि की कामना से बांस की टोकरियों की पूजा करने की भी परंपरा है। इनमें सात प्रकार के अनाज भरकर व्रती महिलाओं को सुहाग सामग्री के साथ प्रदान किया जाता है। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ की बहनों ने कहा कि हमारे प्रत्येक व्रत और त्योहार के पीछे धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेश छिपा है। इन परंपराओं का निर्वहन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
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