स्वयं के महत्व को पहचानना ही तनाव मुक्ति का मार्ग है : बीके स्वाति दीदी
10 अक्टूबर 2026, बिलासपुर। तनाव का असली कारण काम का दबाव या बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि हमारे विचारों की कमजोरी है। जब हम दूसरों के व्यवहार से प्रभावित होने लगते हैं, तो तनाव पैदा होता है। आत्म-सम्मान अहंकार नहीं, बल्कि स्वयं की आंतरिक शक्तियों, गुणों और दिव्य पहचान को स्वीकार करना है। जब एक पुलिसकर्मी आत्म-सम्मान में स्थित होकर कर्तव्य निभाते है, तो भारी दबाव और नकारात्मक माहौल भी उसकी मानसिक शांति को भंग नहीं कर सकता। यह प्रेरक विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष व्यक्त किए। वे पुलिस विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बिलासपुर रेंज के "रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स" के चतुर्थ बैच में "तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य" विषय पर संबोधित कर रही थीं। यह पूरा आयोजन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) माननीय भ्राता रामगोपाल गर्ग जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) माननीय भ्राता रजनेश सिंह जी तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) माननीय बहन मधुलिका सिंह के विशेष मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य पुलिस बल को मानसिक रूप से सुदृढ़ और ऊर्जावान बनाना है। सत्र के दौरान बीके स्वाति दीदी ने पुलिस अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्म-सम्मान का अर्थ है अपने वास्तविक महत्व को जानना। अपनी खूबियों, कमियों, मूल्यों और आंतरिक शक्तियों को स्वीकार करना। जब हम यह मान लेते हैं कि हमारा अस्तित्व अनमोल है और हम समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, तो यही सच्चा आत्म-सम्मान है। एक पुलिस अधिकारी समाज का रक्षक होता है। यदि वह स्वयं के गौरव और अपनी शक्तियों को भूल जाए, तो वह तनाव का शिकार हो जाएगा। जब हमारे भीतर आत्म-सम्मान जागृत होता है, तो हमारी सहनशक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और सकारात्मकता कई गुना बढ़ जाती है। फिर सामने कितनी भी बड़ी चुनौती या आलोचना आए, मन विचलित नहीं होता। आत्म-सम्मान से भरा व्यक्ति हर परिस्थिति में शांत रहकर सही और न्यायपूर्ण निर्णय ले सकता है। मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने का व्यावहारिक मंत्र देते हुए स्वाति दीदी ने कहा कि जैसे शरीर को ऊर्जा के लिए भोजन चाहिए, वैसे ही मन को शक्तिशाली बनाने के लिए प्रतिदिन राजयोग मेडिटेशन और सकारात्मक विचारों की खुराक जरूरी है। अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ मिनट स्वयं को देने से मानसिक थकान दूर होती है और कार्यक्षमता में चमत्कारिक सुधार आता है। आईजी रामगोपाल गर्ग जी और एसएसपी रजनेश सिंह जी के विजन के कारण ही इस कोर्स में कानून व्यवस्था की ट्रेनिंग के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। एएसपी मधुलिका सिंह की देखरेख में आयोजित इस सत्र में उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने दीदी के सेशन की मुक्त कंठ से सराहना की l
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