बलौदाबाजार: आत्मानंद स्कूल में शराबी शिक्षक के हंगामे पर बवाल,
बलौदाबाजार। पंडित चक्रपाणी मल्टीपरपज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल में एक शिक्षक की कथित करतूतों को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। कक्षा 11वीं और 12वीं के विज्ञान व्याख्याता नरेश तिवारी पर शराब के नशे में स्कूल आने, छात्राओं से अभद्रता, गाली-गलौज व मारपीट करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला उस वक्त और भड़क गया जब शिकायत के दौरान केबिन में वीडियो बना रहे एक छात्र को प्रिंसिपल वंदनी श्रीवास्तव ने थप्पड़ जड़ दिया और मीडियाकर्मियों से बदसलूकी की। इस घटना के विरोध में पत्रकार स्कूल परिसर के सामने धरने पर बैठ गए। नशे में छात्राओं से गाली-गलौज और फेल करने की धमकी विद्यार्थियों और परिजनों के अनुसार, शिक्षक नरेश तिवारी करीब एक सप्ताह पूर्व शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने छात्राओं के साथ बदसलूकी व गाली-गलौज की और विरोध करने पर मारपीट पर उतर आए। छात्रों ने जब उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही, तो शिक्षक ने उन्हें परीक्षा में फेल करने की धमकी दी। परेशान होकर छात्र अपने अभिभावकों के साथ शिकायत दर्ज कराने प्रिंसिपल के पास पहुंचे थे। "दिस इज माय ऑर्डर" कहकर छात्र को मारा थप्पड़, मीडिया पर रोक मामले की कवरेज के लिए जब मीडियाकर्मी प्रिंसिपल के केबिन में पहुंचे और बातचीत हो रही थी, तभी एक छात्र मोबाइल से घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड करने लगा। आरोप है कि प्रिंसिपल ने “दिस इज माय ऑर्डर” कहते हुए रिकॉर्डिंग बंद करने का दबाव बनाया और छात्र को सबके सामने थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उन्होंने मीडियाकर्मियों को केबिन से बाहर जाने को कहते हुए स्कूल में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक की बात कही, जिसका कोई लिखित आदेश वे नहीं दिखा सकीं। प्रिंसिपल के इस रवैये से आक्रोशित होकर मीडियाकर्मी स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। कलेक्टर के निर्देश पर जांच टीम पहुंची, शिक्षक को मुलाहिजा के लिए ले गई पुलिस विवाद बढ़ता देख कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासनिक अमला हरकत में आया। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और तहसीलदार ने स्कूल पहुंचकर छात्र-छात्राओं, परिजनों, प्रिंसिपल और आरोपी शिक्षक से अलग-अलग बयान दर्ज किए। जांच के बाद पुलिस शिक्षक नरेश तिवारी को चिकित्सीय मुलाहिजा (मेडिकल जांच) के लिए अस्पताल ले गई। प्रशासन का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षक और प्रबंधन के खिलाफ वैधानिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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