बदहाल हॉस्टलों की जमीनी हकीकत: जर्जर कमरे, गंदगी और सुरक्षा का अभाव, छात्रों की जान जोखिम में

1. मुख्य मुद्दा (ग्राउंड रिपोर्ट): बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से बिलासपुर आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल उनका दूसरा घर होना चाहिए। लेकिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे हॉस्टलों की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक है। छात्र क्षमता से अधिक संख्या में छोटे-छोटे, जर्जर कमरों और पट्टियों पर रहने को मजबूर हैं। 2. मुख्य समस्याएं: जर्जर भवन और तंग रास्ते: कमरों तक पहुँचने के लिए संकरी गलियाँ, कीचड़, कचरा और गंदगी भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। दरवाजे टूटे हुए हैं, खिड़कियाँ जर्जर हैं और दीवारें सीलन व काई से भरी हैं। प्लायवुड के सहारे कमरे: कई हॉस्टलों में ईंट-सीमेंट की दीवारों के बजाय पतली, सड़ी-गली प्लायवुड की पार्टिशन वॉल बनाकर कमरे खड़े कर दिए गए हैं। एक पतले तख्त का किराया 2 हज़ार रुपये: बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल एक तख्त दिया जाता है, जिसका किराया भी प्रति छात्र ₹2,000 वसूला जा रहा है। एक-एक छोटे कमरे में कई छात्रों को ठूंसकर रखा जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था का अभाव: कई जगह आने-जाने का सुरक्षित रास्ता तक नहीं है, गलियारों में अंधेरा रहता है और दीवारों पर प्लास्टर उखड़ चुका है। गैस सिलेंडर व पाइप खुले में रखे हैं, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। अस्थायी शेड व बरसाती पानी: छतों पर टीन व पॉलीथिन लगाकर जुगाड़ किया गया है। बारिश में जलभराव और गंदगी के कारण कमरों तक पहुंचना दूभर हो जाता है। 3. प्रशासन की लापरवाही: जिले में कोचिंग सेंटर और हॉस्टल तो बड़ी संख्या में संचालित हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन के पास इनका कोई पुख्ता भौतिक सत्यापन (Physical Verification) या रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। न तो नियमित निरीक्षण किया गया और न ही सुरक्षा मानकों की जांच की गई। 4. जिम्मेदार अधिकारियों के बयान: सत्यापन कराया जाएगा: आवासीय क्षेत्रों में चल रहे सभी हॉस्टलों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई की जाएगी। (– प्रकाश सर्वे, निगम कमिश्नर) निरीक्षण कराया जाएगा: जिले में कितने हॉस्टल पंजीकृत हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। हॉस्टल संचालन के नियमों का पालन कराने के लिए जांच दल बनाकर निरीक्षण कराया जाएगा। (– पूजा तिवारी, एसडीएम)

Sep 9, 2026 - 13:49
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