15 साल बाद द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग: 4 सितंबर को मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, जानिए निशीथ काल पूजा का शुभ मुहूर्त
4 सितंबर को मनेगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि गुरुवार मध्यरात्रि पश्चात (4 सितंबर की रात) 2:25 बजे से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में केवल अष्टमी तिथि ही नहीं, बल्कि मध्यरात्रि के समय और रोहिणी नक्षत्र की स्थिति का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इन्हीं गणनाओं के आधार पर शुक्रवार मध्यरात्रि को कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 15 साल बाद बना द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। पूरे 15 साल बाद ऐसा विशेष योग बन रहा है, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव ठीक उसी संयोग में मनेगा जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय बना था। निशीथ काल: रात्रि 11:58 बजे से 12:44 बजे तक जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि के निशीथ काल में करने की परंपरा है। इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। जिस समय कान्हा का जन्म हुआ था, उस समय रोहिणी नक्षत्र विद्यमान था, इसलिए इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। निशीथ काल में पूजा का शुभ समय लगभग रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दुर्लभ संयोग में पूजा व व्रत करने से पापों का क्षय और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। हर्षण योग से दिन की शुरुआत और मंदिरों में उत्सव 4 सितंबर को दिन की शुरुआत 'हर्षण योग' में होगी, जो दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। जन्मोत्सव को लेकर राजधानी के इस्कॉन मंदिर, खाटू श्याम मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिरों में भजन संध्या व उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं भगवान की जन्मभूमि व लीलाभूमि मथुरा-वृंदावन में भी भारी उत्साह है, जहां बांके बिहारी मंदिर समेत तमाम प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
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