गरियाबंद: झाखरपारा सहकारी समिति में फिर बड़ा घोटाला! 10.38 लाख की खाद गायब,
गरियाबंद (झाखरपारा): झाखरपारा सेवा सहकारी समिति एक बार फिर कथित अनियमितताओं और स्टॉक में भारी गड़बड़ी को लेकर विवादों में घिर गई है। पिछले सीजन में हुए 57 लाख रुपये के धान घोटाले के बाद अब समिति में लाखों रुपये की खाद का शॉर्टेज सामने आया है। 2 सितंबर को सहकारिता विभाग के सुपरवाइजर द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में करीब 10.38 लाख रुपये मूल्य की खाद स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड दोनों से नदारद मिली। नोटिस के बाद भी 5 लाख का हिसाब अधूरा: स्टॉक में अंतर मिलने पर समिति प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर ने खाद-बीज प्रभारी अभय नागेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 30 सितंबर तक समायोजन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, लेकिन अंतिम रिपोर्ट में भी करीब 5 लाख रुपये की खाद का कोई हिसाब नहीं मिल सका। आरोप है कि सत्यापन के दौरान गोदाम में काफी समय तक ताला लटका रहा और प्रभारी मौके पर उपलब्ध नहीं हुए। धान खरीदी में भी हुआ था 57 लाख का गोलमाल: गौरतलब है कि इसी समिति में पिछले धान खरीदी सत्र के दौरान करीब 2,400 क्विंटल धान (कीमत लगभग 57 लाख रुपये) का शॉर्टेज दर्ज हुआ था। मामले में तत्कालीन प्रभारी पर 20 लाख रुपये की गड़बड़ी सिद्ध होने पर कार्रवाई भी की गई थी, जिसके बाद से लगातार समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विवादित नियुक्ति पर भड़के किसान, वार्षिक बैठक स्थगित: किसानों और शेयरधारकों का आक्रोश समिति में की गई नियुक्तियों को लेकर भी है। दो वर्ष पूर्व रिश्वतखोरी के मामले में बर्खास्त किए गए एक कर्मचारी को पुनः झाखरपारा समिति का प्रभार सौंपे जाने का कड़ा विरोध हो रहा है। 30 सितंबर को आयोजित वार्षिक सम्मेलन में किसानों ने इस नियुक्ति और खाद घोटाले को लेकर जमकर हंगामा किया, जिसके चलते बैठक को महज दो घंटे में ही स्थगित करना पड़ा। जांच और रिकॉर्ड मिलान के बाद होगी कार्रवाई: देवभोग जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक नयन सिंह ठाकुर ने खाद के स्टॉक में कमी की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन का अंतिम मिलान कराया जा रहा है, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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