गांधी जयंती पर केंद्रीय जेल में बंदियों को सत्य और अहिंसा का संदेश
बिलासपुर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर केंद्रीय जेल बिलासपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सहयोग से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिराजुद्दीन कुरैशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असलम खान, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनिल चौहान, जेल अधीक्षक खोमेश मण्डावी सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्तागण एवं स्टाफ तथा जेल स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम की शुरुआत “वैष्णव जन तो तेने कहिए” भजन की धुन के साथ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। इस अवसर पर केंद्रीय जेल के बंदियों ने “ऐ मालिक तेरे बंदे हम” तथा “रघुपति राघव राजाराम” भजन प्रस्तुत किए। बंदियों की प्रस्तुति को मुख्य अतिथि ने भावपूर्ण एवं प्रभावशाली बताते हुए सराहना की। मुख्य अतिथि ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल में जीवन कठिन परिस्थितियों से भरा हो सकता है, लेकिन यहां बिताए जाने वाले समय का उपयोग निराशा में करने के बजाय स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने बंदियों को जेल में उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करते हुए नई चीजें सीखने, अपने व्यक्तित्व में सुधार करने तथा अनुशासन एवं अच्छे आचरण के साथ समय व्यतीत करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में महात्मा गांधी के जीवन, विचारों एवं आदर्शों का स्मरण करते हुए सत्य, अहिंसा, प्रेम, मानवता, स्वच्छता, सद्भाव, नशामुक्ति एवं सेवा जैसे मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। उनके संदेशों को वर्तमान जीवन में अपनाने की आवश्यकता बताई गई। मुख्य अतिथि ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि सत्य, अहिंसा एवं सकारात्मक विचारों के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में परिवर्तन ला सकता है। बंदियों को भी अपने वर्तमान समय का सदुपयोग करते हुए भविष्य को बेहतर बनाने तथा समाज की मुख्यधारा में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध रहकर कक्षा 10वीं, 12वीं तथा स्नातक परीक्षाओं में उत्तीर्ण बंदियों एवं कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बंदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर जेल अधीक्षक द्वारा बंदियों को महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने की शपथ दिलाई गई। साथ ही केंद्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध दंडित बंदियों को नियमानुसार 10-10 दिवस के अतिरिक्त परिहार (रेमिशन) का लाभ दिए जाने की घोषणा की गई।
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