बेलगहना और कोटा क्षेत्र में बाघ की दस्तक: मवेशी का शिकार,
1. बेलगहना में बाघ की दस्तक और दहशत कोटा के बाद अब पहली बार बेलगहना क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई है। बुधवार दोपहर बाघ ने एक पालतू मवेशी का शिकार किया और फिर वापस जंगल की ओर लौट गया। बाघ को अचानक सामने देखकर स्थानीय लोग डर के मारे अपने-अपने घरों और दुकानों में बंद हो गए। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। 2. वन विभाग की निगरानी और मुनादी सूचना मिलते ही कोटा वन परिक्षेत्र के उप वनमंडलाधिकारी अनिल भास्करन ने वन कर्मियों को गश्त और निगरानी तेज करने के निर्देश दिए। सर्चिंग के दौरान वन विभाग की टीम को जमीन पर बाघ के पगमार्क (पैरों के निशान) मिले हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए गांव-गांव में मुनादी कराई जा रही है। बाघ की मौजूदगी फिलहाल सीमावर्ती क्षेत्र यानी मरही माता मंदिर और मनवारटैंक के आसपास आंकी गई है। 3. बाघिन और शावकों की मौजूदगी पिछले 10 दिनों के भीतर कोटा के नवागांव में भी ग्रामीणों ने बाघ देखा था। इसके बाद कोटा और शिवतराई के बीच स्थित सलका गांव में एक बाघिन को दो शावकों (बच्चों) के साथ घूमते देखा गया। पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने शावकों समेत बाघिन की सघन ट्रैकिंग शुरू कर दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सामने दिखे बाघ की उम्र लगभग 2 वर्ष के आसपास आंकी गई है। 4. बफर जोन की ओर रुख करने का मुख्य कारण अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में बाघों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। संख्या बढ़ने और इलाका सीमित होने के कारण मादा बाघिन अपने छोटे शावकों को नर बाघों के हमलों से बचाने के लिए बफर जोन और ग्रामीण सीमाओं की ओर ले आती है। बफर क्षेत्र में 19 से अधिक गांव आते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। कुछ दिन पहले दावांणपुर गांव में खेत में काम कर रहे एक किसान पर भी बाघ ने हमला किया था। इस घटना के बाद पीपरखुंटी, परसदा, दावांणपुर, मानपुर, औरापानी और शिवतराई जैसे गांवों में दहशत का माहौल है। बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने जगह-जगह ट्रैप कैमरे लगाए हैं, जिनमें उनकी तस्वीरें भी रिकॉर्ड हुई हैं।
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