नाबालिग से देह व्यापार और गैंगरेप मामले में 2 महिलाओं सहित 5 दोषियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद
राजनांदगांव की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो कोर्ट) ने नाबालिग के अपहरण, मानव तस्करी, देह व्यापार और सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार बारा की अदालत ने 19 अगस्त 2026 को 5 दोषियों को अंतिम सांस (शेष प्राकृतिक जीवनकाल) तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति की गुंजाइश नहीं है। घटनाक्रम: मदद के बहाने फंसाया, फिर रायपुर से रायगढ़ तक शोषण झांसा देकर बंधक बनाया: फरवरी 2024 में छुरिया थाना क्षेत्र की रहने वाली नाबालिग बैंक के काम से निकली थी। बस में आरोपी साधना वैष्णव उर्फ संध्या से मुलाकात हुई, जो उसे रायपुर स्थित अपने घर ले गई। देह व्यापार में धकेला: रायपुर में साधना और श्रीकुमारी उर्फ मुस्कान गोस्वामी ने नाबालिग को बंधक बनाकर पैसों के लिए जबरन देह व्यापार के दलदल में झोंक दिया। गैंगरेप और टॉर्चर: इसके बाद पीड़िता को रायगढ़ के बाजिनपाली ले जाया गया, जहाँ लगातार यौन शोषण के साथ-साथ चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर और धनंजय धृतलहरे ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। साइबर सेल की मदद से रेस्क्यू: नाबालिग ने गुप्त रूप से मोबाइल से अपने भाई को लोकेशन और बंधक होने की सूचना दी। पुलिस ने साइबर सेल की तकनीकी सहायता से 27 फरवरी 2024 को रायगढ़ से आरोपी साधना के चंगुल से पीड़िता को सुरक्षित बरामद किया। दोषियों को सुनाई गई सजा का विवरण साधना वैष्णव उर्फ संध्या व श्रीकुमारी उर्फ मुस्कान: आईपीसी की धारा 376-घक/109 के तहत अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और पॉक्सो एक्ट धारा 6/17 में 20 वर्ष का सश्रम कारावास। चेतन नवरंगे, तोरण सोनकर व धनंजय धृतलहरे: धारा 376-घक व 376(3) के तहत शेष जीवनकाल तक उम्रकैद और पॉक्सो एक्ट धारा 5(छ)/6 में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास व अर्थदंड। गोपीराम कोल (संदेह का लाभ): साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने गोपीराम कोल को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन और पुलिस की मजबूत पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुश्री प्रिया कांकरिया ने शासन की ओर से मजबूत साक्ष्य रखे, जबकि तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक अवनीश कुमार श्रीवास के नेतृत्व में ठोस विवेचना कर चालान पेश किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए अदालत ने रेखांकित किया कि यौन हिंसा पीड़िता को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुँचाती है, जिसके चलते दोषियों को अधिकतम सजा दी गई।
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