“3 मांगें, आर-पार की लड़ाई! पटवारियों का हल्लाबोल,अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान”
बिलासपुर में अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। कोन्हेर गार्डन में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए पटवारियों ने रैली निकालकर कलेक्टोरेट का घेराव किया और शासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। पटवारियों की प्रमुख मांगों में पीवीएएफ व्यवस्था का विरोध, वेतन विसंगति दूर करना और पदोन्नति शामिल है। आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। ऐसे में राजस्व से जुड़े कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।तीन मांगें... और आर-पार की लड़ाई का ऐलान! बिलासपुर में पटवारियों का आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर पटवारी पहले कोन्हेर गार्डन में एकत्रित हुए और फिर रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।पटवारियों का कहना है कि पीवीएएफ व्यवस्था में तकनीकी और मैदानी स्तर पर कई परेशानियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है। दूसरी बड़ी मांग वेतन विसंगति को लेकर है। उनका आरोप है कि वर्ष 2017 के बाद नियुक्त पटवारियों और पुराने कर्मचारियों के वेतन में बड़ा अंतर है। उदाहरण देते हुए पटवारियों ने बताया कि वर्ष 2018 में नियुक्त एक पटवारी को करीब 38 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि वर्ष 2003 से कार्यरत पटवारी का वेतन 49 हजार रुपये से अधिक है।तीसरी और अहम मांग पदोन्नति की है। पटवारियों का कहना है कि राजस्व विभाग के दूसरे पदों पर कर्मचारियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, लेकिन पटवारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हैं। वे चाहते हैं कि उनके लिए भी पदोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।पटवारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल मांगों का मामला नहीं, बल्कि उनके अधिकारों की लड़ाई है। अब देखना होगा कि शासन पटवारियों की तीन सूत्रीय मांगों पर कब तक फैसला लेता है। फिलहाल, अनिश्चितकालीन हड़ताल के ऐलान के बाद राजस्व विभाग के कामकाज पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
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