जांच में चयन नियम विरुद्ध, सेवा समाप्ति की अनुशंसा के बाद भी फैसला लंबित!
पेंडारी अतिथि शिक्षक मामले में जेडी का बयान—कमिश्नर के निर्देश पर होगी कार्रवाई, पूर्व डीईओ पर मामला एक महीने दबाकर रखने का आरोप वाड्रफनगर/अंबिकापुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पेंडारी में अतिथि शिक्षक के चयन का मामला अब उच्चस्तर पर पहुंच गया है। जांच में चयन नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने और सेवा समाप्ति की अनुशंसा के बावजूद कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच, संयुक्त संचालक शिक्षा (जेडी) अंबिकापुर श्री सिंह ने स्पष्ट किया है कि मामले में अभिमत लेकर कमिश्नर को भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देशों के अनुसार की जाएगी। कमिश्नर के निर्देश पर होगी आगे की कार्रवाई जेडी श्री सिंह के अनुसार, शिकायत सीधे कमिश्नर के समक्ष की गई थी। कमिश्नर द्वारा मामले में अभिमत मांगे जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से अभिमत मंगाकर भेज दिया गया है। अब कमिश्नर से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जेडी के इस बयान के बाद अब निगाहें कमिश्नर के निर्णय पर टिक गई हैं। जांच में चयन नियम विरुद्ध, सेवा समाप्ति की अनुशंसा प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता मयंक सिंह ने 12 मई 2026 को कमिश्नर सरगुजा संभाग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पेंडारी स्कूल में पदस्थ अतिथि शिक्षक राजपति यादव के चयन पर सवाल उठाए गए थे। जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर-रामानुजगंज ने 29 सितंबर 2026 के जांच प्रतिवेदन में राजपति यादव को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी नहीं बताते हुए चयन को नियमों के अनुरूप नहीं पाया और उनकी सेवाएं समाप्त करने की अनुशंसा की थी। एक महीने तक फाइल क्यों रही लंबित? जेडी श्री सिंह के कथन के अनुसार, पूर्व डीईओ द्वारा मामले को करीब एक महीने तक दबाकर रखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जांच प्रतिवेदन में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए सेवा समाप्ति की अनुशंसा की गई थी, तो प्रकरण को आगे बढ़ाने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या इस देरी के लिए जिम्मेदारी तय होगी, यह भी अब महत्वपूर्ण सवाल है। शिकायतकर्ता ने मामले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है। शिकायत में जांच शाखा में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विकास यादव पर भी संरक्षण देने और आरटीआई में भ्रामक जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है। अब कमिश्नर के निर्देश और अंतिम कार्रवाई का इंतजार मामले में अब तक की स्थिति से संकेत मिलता है कि अंतिम कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) या संयुक्त संचालक शिक्षा (जेडी) स्तर पर की जा सकती है, लेकिन इसके लिए कमिश्नर के निर्देशों का इंतजार है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जांच रिपोर्ट और सेवा समाप्ति की अनुशंसा के बाद अब कितनी जल्दी निर्णय लिया जाएगा? क्या संबंधित अतिथि शिक्षक पर कार्रवाई होगी और कथित तौर पर फाइल लंबित रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी? अब पूरे मामले में कमिश्नर के निर्देश और उसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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