हाईकोर्ट के फैसले से लिपिक वर्ग को बड़ी राहत, कंप्यूटर परीक्षा के नाम पर वेतन वसूली पर रोक
बिलासपुर। लिपिक संवर्ग से जुड़े कर्मचारियों के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के एक फैसले को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। WPS No. 9471/2023, श्रवण कुमार सिंह बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में न्यायालय ने 2013 के बाद नियुक्त लिपिकों से कंप्यूटर योग्यता के नाम पर वेतन की वसूली से जुड़े आदेश को निरस्त कर दिया है। लिपिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने जारी प्रेस नोट में बताया कि संघ द्वारा नवंबर 2024 में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को दिए गए मांग पत्र में अनुकंपा नियुक्ति के दौरान सहायक ग्रेड-3 पद के लिए हिंदी मुद्रलेखन/कंप्यूटर डिप्लोमा की शर्त को विकल्प के रूप में मानने तथा नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान दिए जाने की मांग की गई थी। संघ का दावा है कि इसी ज्ञापन को हाईकोर्ट के समक्ष महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया। संघ के अनुसार, न्यायालय ने आदेश के पैरा 6 और 7 में नियुक्ति आदेश में प्रयुक्त "/" का अर्थ "या" माना है, न कि "एवं"। याचिकाकर्ता के पास नियुक्ति से पहले ही कंप्यूटर डिप्लोमा होने के आधार पर उसे नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान दिया जाना वैध माना गया। फैसले में 13 मई 2019 के वसूली आदेश को निरस्त, 8 सितंबर 2017 से नियमित वेतनमान बहाल करने तथा तीन माह के भीतर ग्रेड-2 में पदोन्नति के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बिना नोटिस की गई वेतन वसूली को भी अवैधानिक माना गया है। प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि यह फैसला प्रदेश के उन लिपिक कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनसे इसी तरह की वसूली या पदोन्नति से संबंधित मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ इस आदेश को सभी विभागाध्यक्षों तक पहुंचाकर इसका लाभ अन्य प्रभावित कर्मचारियों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
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