संघर्ष से सम्मान तक, लखपति दीदी कुसुम सिन्हा का प्रेरणादायक सफर
बालोद - बालोद जिले के डौण्डी विकासखण्ड का एक छोटा सा गाँव ’’कुमुड़कट्टा’’ आज एक नई पहचान बना रहा है। इस पहचान के पीछे हाथ है कुसुम सिन्हा का, जिन्होंने अपनी मेहनत और सरकार की योजनाओं के सही तालमेल से खुद को और अपने साथ जुड़ी महिलाओं को आर्थिक आजादी दिलाई है। कुसुम सिन्हा की सफलता की कहानी तब शुरू हुई जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ीं। उन्होंने जय माँ पहाड़ों वाली स्वसहायता समूह का गठन किया और उसकी अध्यक्ष बनीं। जहाँ पहले ग्रामीण महिलाओं के पास आय के सीमित साधन थे, वहीं इस समूह ने उन्हें हुनर और स्वरोजगार का मंच प्रदान किया। कुसुम सिन्हा और उनके समूह की 12 महिलाओं ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने समय की मांग को समझा और अपने काम में विविधता लाई। त्यौहार के दौरान आकर्षक राखी, रंगोली और हर्बल गुलाल, लोगों की मांग के अनुरूप विभिन्न प्रकार के शुद्ध अचार और मशरूम उत्पादन तथा सिलाई-कढ़ाई से कपड़ों का निर्माण। इन विविध गतिविधियों ने यह सुनिश्चित किया कि समूह के पास साल भर आय का स्रोत बना रहे। आज कुसुम सिन्हा गर्व के साथ खुद को लखपति दीदी कहती हैं, जो उनकी आर्थिक उन्नति का प्रमाण है। कुसुम सिन्हा बताती हैं कि राज्य सरकार की ’’महतारी वंदन योजना’’ ने महिलाओं के आत्मविश्वास को एक नया आयाम दिया है। समूह की महिलाओं को मिलने वाली 01 हजार रुपये की मासिक राशि, छोटी लग सकती है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में यह उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने और बचत की आदत डालने में क्रांतिकारी साबित हो रही है। कुसुम सिन्हा ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एक बड़े भाई की तरह छत्तीसगढ़ की महिलाओं का ख्याल रख रहे हैं। महतारी वंदन योजना से मिलने वाले पैसे को हम जमा कर रहे हैं, जो जरूरत के समय हमारे बहुत काम आते हैं। यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और शासन का सहयोग मिले, तो कोई भी महिला अपनी किस्मत खुद लिख सकती है। आज कुसुम सिन्हा न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण भी हैं।
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