देवरीखुर्द सहकारी समिति में नियुक्ति को लेकर उठे सवाल, क्या बिना विभागीय अनुमति हुई थी प्रबंधक की नियुक्ति?
पोड़ी समिति की नियुक्तियां रद्द होने के बाद देवरीखुर्द का मामला भी गरमाया, राम मनोहर कौशिक की नियुक्ति पर जांच की मांग***** बिलासपुर। सेवा सहकारी समिति मर्यादित देवरीखुर्द पं.क्र. 670 में प्रबंधक के पद पर पदस्थ राम मनोहर कौशिक पिता द्वारिका कौशिक, निवासी देवरीखुर्द (काठाकोनी) की नियुक्ति को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि उनकी नियुक्ति भी बिना सक्षम विभागीय अनुमति अथवा पूर्व स्वीकृति के की गई थी। हालांकि, इस संबंध में अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया है, जब हाल ही में तखतपुर विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मर्यादित पोड़ी के धान खरीदी केंद्र में बिना विभागीय पूर्व अनुमति की गई नियुक्तियों पर सहकारिता विभाग ने कार्रवाई की। पोड़ी मामले में प्रभारी प्रबंधक रुद्र तिवारी को पद से हटा दिया गया, जबकि प्रफुल्ल कुमार साहू की ऑपरेटर तथा कृष्ण कुमार वस्त्रकार की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (भृत्य) के पद पर की गई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गईं। पोड़ी मामले में शिकायत के बाद सामने आया था कि संबंधित नियुक्तियों के लिए उच्च अधिकारी अथवा उप पंजीयक कार्यालय से पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई थी। विभागीय कार्रवाई के बाद अब इसी तरह की प्रक्रिया को लेकर देवरीखुर्द समिति की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। देवरीखुर्द में भी वही नियम लागू होते हैं या नहीं? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सेवा सहकारी समिति देवरीखुर्द में प्रबंधक राम मनोहर कौशिक की नियुक्ति भी निर्धारित विभागीय प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना हुई है, तो उनकी नियुक्ति के दस्तावेजों की जांच कब होगी और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी? स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर नियुक्ति आदेश, चयन प्रक्रिया, विभागीय अनुमति, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति तथा पदस्थापना से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग उठ रही है। यदि दस्तावेजों की जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो पोड़ी समिति की तर्ज पर देवरीखुर्द मामले में भी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार देवरीखुर्द समिति के प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। संबंधित सहकारिता अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में पूरे मामले में विभागीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सवाल यह है कि पोड़ी समिति में बिना अनुमति नियुक्तियों पर कार्रवाई हो सकती है, तो क्या देवरीखुर्द समिति में भी नियुक्ति प्रक्रिया की जांच होगी? यही सवाल फिलहाल सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर नजरें टिकाए हुए है।
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