स्कूल की नौकरी या तहसील की ड्यूटी? नकल शाखा में शिक्षक की कथित तैनाती ने खड़े किए गंभीर सवाल, आदेश और भुगतान की जांच जरूरी”

हाईकोर्ट-शासन के निर्देशों के बीच नियमों की अनदेखी का आरोप, बिलासपुर। बिलासपुर तहसील कार्यालय की नकल शाखा में शिक्षा विभाग के एक शिक्षक से कथित तौर पर अतिरिक्त समय में काम कराए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिल्हा विकासखंड के बाम्हू पंचायत स्थित स्कूल में पदस्थ शिक्षक निशांत वर्मा स्कूल ड्यूटी के अलावा तहसील कार्यालय की नकल शाखा में दोपहर करीब 3 बजे से शाम 7-8 बजे तक कार्य करते हैं। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि तहसील कार्यालय में आम लोगों की जमीन, राजस्व और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों से संबंधित रिकॉर्ड एवं नकल कार्य होता है। ऐसे संवेदनशील कार्य में किसी अन्य विभाग के कर्मचारी/शिक्षक की तैनाती या सेवाएं किस आदेश और किस प्रावधान के तहत ली जा रही हैं, यह जांच का विषय है। ****किसके आदेश पर तहसील में शिक्षक की ड्यूटी?**** सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिक्षक वास्तव में तहसील की नकल शाखा में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं तो उन्हें वहां बैठाने का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया? क्या इसके लिए एसडीएम या तहसीलदार का लिखित आदेश है? क्या जिला शिक्षा अधिकारी अथवा संबंधित शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी है? और यदि शिक्षक की स्कूल में नियमित पदस्थापना है तो तहसील कार्यालय में अतिरिक्त समय में कार्य करने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई है? ****देर शाम तक नकल शाखा में बैठने की वजह क्या? स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि निर्धारित कार्यालयीन व्यवस्था के बाद शिक्षक को देर शाम तक नकल शाखा में बैठाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। यदि यह व्यवस्था प्रशासनिक आवश्यकता के कारण है तो उसका लिखित आदेश, ड्यूटी चार्ट और जिम्मेदारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? ***शिक्षक की दोहरी जिम्मेदारी की हो जांच*** मामले में यह भी जांच जरूरी है कि शिक्षक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूल में निर्धारित समय पर पूरी तरह उपस्थित रहते हैं या नहीं। यदि स्कूल ड्यूटी प्रभावित हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? वहीं तहसील की नकल शाखा में कार्य करने के दौरान उनके अधिकार, पहुंच और जिम्मेदारी भी स्पष्ट की जानी चाहिए। ***कमाई के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच*** शिक्षक को तहसील कार्यालय में कथित रूप से अतिरिक्त समय तक बैठाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यदि किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि, निजी भुगतान अथवा अनधिकृत आर्थिक लेन-देन हो रहा है तो उसकी भी जांच आवश्यक है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकती है। ***अब प्रशासन को देना होगा स्पष्ट जवाब*** मामला केवल एक शिक्षक के तहसील कार्यालय में बैठने तक सीमित नहीं है। सवाल प्रशासनिक आदेश, विभागीय अनुशासन, सरकारी कार्यालय की पारदर्शिता और संवेदनशील राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए कलेक्टर और एसडीएम स्तर से तत्काल जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि— **शिक्षक को तहसील कार्यालय में कार्य करने की अनुमति किसने दी? **क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ है? ***जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी थी या नहीं? ***शिक्षक की स्कूल में उपस्थिति और तहसील में उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या कहता है? ***नकल शाखा में उनकी भूमिका और अधिकार क्या निर्धारित किए गए हैं? ***क्या उनके माध्यम से किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि अथवा निजी लेन-देन हुआ? ***यदि व्यवस्था नियम विरुद्ध है तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस मामले को महज एक कर्मचारी की ड्यूटी मानकर टालता है या तहसील की नकल शाखा में शिक्षक की कथित तैनाती के पूरे मामले की विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय करता है।

Sep 17, 2026 - 12:59
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स्कूल की नौकरी या तहसील की ड्यूटी? नकल शाखा में शिक्षक की कथित तैनाती ने खड़े किए गंभीर सवाल, आदेश और भुगतान की जांच जरूरी”

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