छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा: सिर्फ छापेमारी नहीं, सरकारी धन की रिकवरी
फर्जी क्लेम पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत फर्जी क्लेम और अनियमितताओं पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। 30 सितंबर 2026 को प्रदेश के 17 अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया गया, जिनमें से रायपुर के दो अस्पतालों का आयुष्मान पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। डिजिटल और फिजिकल ऑडिट की आवश्यकता: विशेषज्ञों और जनहित समूहों का मानना है कि जांच केवल कुछ चिन्हित अस्पतालों तक सीमित न रहकर प्रदेश के सभी एम्पैनल्ड अस्पतालों तक विस्तारित होनी चाहिए। इसमें भर्ती की वास्तविकता, पैथोलॉजी-रेडियोलॉजी रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, बिलों के मिलान, फैंटम बिलिंग (फर्जी मरीज) और एजेंटों के कमीशन खेल की सघन जांच आवश्यक है। कड़े कानूनी प्रावधान और पेनल्टी: सरकारी नियमों के मुताबिक फर्जीवाड़े (जैसे अपकोडिंग, क्लोनिंग या इनफ्लेटेड बिलिंग) के मामलों में क्लेम की राशि का 5 गुना तक जुर्माना, अस्पताल का सस्पेंशन/डी-एम्पैनलमेंट तथा सिविल व आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के स्पष्ट प्रावधान हैं। सरकार के समक्ष प्रमुख सवाल: क्या प्रदेश के सभी आयुष्मान अस्पतालों का वार्षिक अनिवार्य और औचक फिजिकल ऑडिट होगा? फर्जी क्लेम साबित होने पर सरकारी राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी की समय-सीमा क्या होगी? अस्पतालों के साथ-साथ इसमें संलिप्त डॉक्टरों, कर्मचारियों और दलालों पर कानूनी कार्रवाई होगी? मरीजों से मुफ्त इलाज के बदले की गई अवैध वसूली की भरपाई कैसे कराई जाएगी? क्या जिलावार कार्रवाई और शिकायतों की रिपोर्ट जनता के लिए सार्वजनिक की जाएगी? मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा: आयुष्मान योजना गरीब व जरूरतमंद परिवारों का बड़ा संबल है। निष्पक्ष व्यवस्था की मांग है कि ईमानदार अस्पतालों और मरीजों के हितों को प्रभावित किए बिना, फर्जीवाड़ा करने वालों पर प्रमाण-आधारित व पारदर्शी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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