धान खरीदी में बड़ा खेल! समिति कर्मचारी ही बना किसानों का ‘नॉमिनी’, जांच में रिश्तेदारों के नाम उजागर...कार्यवाही या अभयदान
सेवा सहकारी समिति पोड़ी का मामला—जांच में 5 किसानों के रिकॉर्ड में कर्मचारी के रिश्तेदारों के नाम मिले, धान खरीदी नीति के उल्लंघन की पुष्टि बिलासपुर/कोटा। सेवा सहकारी समिति पोड़ी (करनकापा) में धान खरीदी को लेकर सामने आई शिकायत ने सहकारिता विभाग में हलचल मचा दी है। किसान द्वारा सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत की विभागीय जांच में समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर टेकलाल जायसवाल से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच प्रतिवेदन में पांच किसानों के रिकॉर्ड की जांच के दौरान उनके नॉमिनी के रूप में कर्मचारी स्वयं अथवा उसके निकट संबंधियों के नाम दर्ज पाए गए हैं। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सहकारिता विस्तार अधिकारी, कोटा द्वारा की गई जांच में इसे छत्तीसगढ़ शासन की धान खरीदी नीति 2025-26 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन और नियम विरुद्ध कृत्य बताया गया है। जांच प्रतिवेदन अब आवश्यक कार्रवाई के लिए उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक, बिलासपुर को भेजा गया है। CM हेल्पलाइन से शुरू हुई जांच शिकायतकर्ता उत्तरा कुमार ने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत की थी कि सेवा सहकारी समिति पोड़ी में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से नॉमिनी बनकर धान खरीदी कराई जा रही है। शिकायत के बाद उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक, बिलासपुर ने 10 सितंबर 2026 को जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता, समिति कर्मचारी टेकलाल जायसवाल और समिति के प्रभारी प्रबंधक को उपस्थित होकर अपना पक्ष एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। 15 सितंबर को सभी पक्ष जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए। जांच में सामने आए पांच नाम जांच प्रतिवेदन के मुताबिक समिति से संबंधित किसानों के रिकॉर्ड में ऐसे नॉमिनी पाए गए, जिनका संबंध कंप्यूटर ऑपरेटर टेकलाल जायसवाल से बताया गया है। जांच में सामने आए मामलों में— परमेन्द्र पिता ललेत, ग्राम कोड़ासर — नॉमिनी टेकलाल जायसवाल। गिरजा बाई कोलाम, ग्राम सिलतरा — नॉमिनी टेकलाल जायसवाल। चंद्रकली पति राधे, ग्राम सांवाडबरा — नॉमिनी सुकलाल, जिसे जांच प्रतिवेदन में टेकलाल जायसवाल की पत्नी से संबंधित बताया गया। प्रहलाद पिता दशरथ, ग्राम सांवाडबरा — नॉमिनी सुकलाल, जो टेकलाल जायसवाल के पिता के नाम से मेल खाता है। बिसनाथ पिता रामलाल, ग्राम सांवाडबरा — नॉमिनी सुकलाल, जिसके रिकॉर्ड में भी वही आधार के अंतिम अंक दर्ज होने का उल्लेख है। जांच अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और समिति प्रबंधक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर इन संबंधों को सत्यापित होना बताया है। ‘किसी तरह की गड़बड़ी नहीं’—कर्मचारी का जवाब पूछताछ के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर टेकलाल जायसवाल ने अपने बयान में कहा कि किसानों द्वारा बताए गए व्यक्तियों को ही नियमानुसार नॉमिनी के रूप में दर्ज किया गया है और उनके स्तर से किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है। हालांकि, जांच प्रतिवेदन में उपलब्ध रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद उनके रिश्तेदारों के नॉमिनी होने की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है। धान खरीदी नीति का स्पष्ट उल्लंघन! जांच प्रतिवेदन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि जांच अधिकारी ने पूरे मामले को छत्तीसगढ़ शासन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी धान खरीदी नीति 2025-26 के प्रावधानों से जोड़ते हुए स्पष्ट निष्कर्ष दिया है। प्रतिवेदन में शासन के 19 अगस्त 2025 एवं 15 अक्टूबर 2025 के आदेशों में दिए गए संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसानों के पंजीयन में समिति कर्मचारी के रिश्तेदारों का नॉमिनी के रूप में दर्ज होना कंडिका 5.6.1 तथा कंडिका 8.3 का स्पष्ट उल्लंघन एवं नियम के विपरीत है। जांच अधिकारी ने इसके लिए सेवा सहकारी समिति पोड़ी के कर्मचारी टेकलाल जायसवाल को जिम्मेदार बताया है। अब सवाल—आगे क्या होगी कार्रवाई? जांच प्रतिवेदन सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सहकारिता विभाग अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित रहेगा या मामले में फर्जी धान खरीदी, शासन को संभावित आर्थिक नुकसान और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी? शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में कथित फर्जी धान खरीदी की राशि की वसूली और एफआईआर की मांग भी की है। अब निगाहें उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। खास बात: अभी जांच प्रतिवेदन में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही आरोपों को रिपोर्ट किया जा रहा है। कथित फर्जी धान खरीदी से हुई वास्तविक आर्थिक क्षति और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की जांच/कार्रवाई में ही स्पष्ट होगा।
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