“प्रारंभ”: एक दशक की साधना का भव्य उत्सव, Sai Nritya Nilayam ने रचा सांस्कृतिक इतिहास....125 से अधिक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बाँधा समां, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की उपस्थिति से बढ़ी गरिमा
बिलासपुर - शहर ने एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या का साक्षी बनते हुए Sai Nritya Nilayam के 10वें स्थापना दिवस “प्रारंभ” को अत्यंत भव्यता और गरिमा के साथ मनाया। कृषि महाविद्यालय ऑडिटोरियम, कोनी में दिनांक 2 मई 2026 को आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक दशक की निरंतर साधना, समर्पण और कला के उत्कर्ष का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। वर्ष 2016 में स्थापित Sai Nritya Nilayam ने भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है, और “प्रारंभ” उसी सफल यात्रा का प्रतीक बनकर सामने आया। संस्था की गुरु एवं अध्यक्ष श्वेता नायक के सशक्त नेतृत्व में कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा और आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य अतिथि हरीश दुहन (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, SECL) तथा विशिष्ट अतिथि नंद किशोर चौरे (डीन, कृषि महाविद्यालय) की उपस्थिति ने आयोजन की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम की विशेष पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियाँ रहीं, जिनमें डॉ. जी. रतीश बाबू (अध्यक्ष, AIDA) एवं डॉ. स्वप्नो कल्पा दास गुप्ता (नृत्य विभाग प्रमुख, NCPA) ने अपनी उत्कृष्ट कला और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर संस्था की चारों शाखाओं तथा ऑनलाइन बैच से जुड़े विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 125 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य रचनाएँ केवल तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन नहीं थीं, बल्कि उनमें भाव, लय, अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक गहराई का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों की भरपूर तालियाँ और सराहना अर्जित की। “प्रारंभ” ने यह संदेश सशक्त रूप से स्थापित किया कि जब गुरु का मार्गदर्शन, साधना का अनुशासन और विद्यार्थियों का समर्पण एक साथ आता है, तो कला केवल मंच तक सीमित नहीं रहती—वह दर्शकों के हृदय में एक स्थायी अनुभूति बन जाती है। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों एवं विशेष प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया गया तथा प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। उपस्थित जनसमूह के चेहरों पर संतोष, गर्व और प्रेरणा की झलक स्पष्ट दिखाई दी—जो इस सफल आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
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