कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम निर्देश: बाल भिखारियों की मदद के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करे राज्य सरकार
बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बाल भिखारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बाल भिखारियों की पहचान, पुनर्वास और उनके खिलाफ होने वाले शोषण को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करे, जो विभिन्न विभागों — जैसे महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, पुलिस और श्रम विभाग — के बीच समन्वय स्थापित करेगा। कोर्ट का मानना है कि विभागों के बीच समुचित तालमेल के अभाव में बाल भिखारियों से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नोडल अधिकारी की नियुक्ति से न केवल त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे, बल्कि बच्चों को भिक्षावृत्ति से बाहर निकालकर उन्हें शिक्षा, संरक्षण और पुनर्वास की मुख्यधारा में लाने में भी मदद मिलेगी। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल भिक्षावृत्ति एक गंभीर सामाजिक समस्या है और इससे निपटने के लिए सरकार को संवेदनशील और ठोस नीति के साथ काम करना होगा।
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