महिला दिवस के जश्न पर भारी लिंगियाडीह की चीख — 108 दिन से घर बचाने सड़क पर बैठी महिलाएं, फिर भी बेखबर प्रशासन सम्मान की बातें मंचों पर, हकीकत सड़क पर
सम्मान की बातें मंचों पर, हकीकत सड़क पर 108 दिन से न्याय के इंतजार में महिलाएं तीन महीने से ज्यादा समय से जारी आंदोलन, ठंड-गर्मी झेल रहीं महिलाएं, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल बिलासपुर: देशभर में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के दावे किए जा रहे हैं। मंचों से महिलाओं के अधिकारों की बातें हो रही हैं, कार्यक्रमों में सम्मान और भाषणों की गूंज सुनाई दे रही है। लेकिन बिलासपुर के लिंगियाडीह इलाके की हकीकत इन तमाम दावों को आईना दिखाती नजर आ रही है। यहां अपने घर और आशियाने को बचाने के लिए महिलाएं पिछले 108 दिनों से लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। अपने बच्चों और परिवार के साथ सड़क पर बैठकर वे न्याय की गुहार लगा रही हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी शासन-प्रशासन की ओर से कोई समाधान सामने नहीं आया है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि वे मजबूरी में आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश हुई हैं। बीते तीन महीनों से अधिक समय से वे लगातार संघर्ष कर रही हैं। कड़ाके की ठंड, तेज धूप और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे अपने घर बचाने की लड़ाई से पीछे नहीं हटीं। उनका कहना है कि यह सिर्फ मकान का नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और उनके अस्तित्व का सवाल है। महिलाओं का आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन बधिर शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को हमारी आवाज अभी भी नही सुनाई दी है। विगत 108 दिनों में शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास हमसे मिलने का समय नही मिल रहा है । ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब महिला सम्मान और सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो 108 दिनों से सड़क पर बैठी इन महिलाओं की पीड़ा आखिर क्यों अनसुनी की जा रही है। धरने पर बैठी महिलाओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगी। उनका कहना है कि जब तक उनके घर और आशियाने को सुरक्षित रखने की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। धरनास्थल से आवाज: “हम अपने घर और बच्चों का भविष्य बचाने के लिए 108 दिनों से सड़क पर बैठे हैं। ठंड, धूप सब झेल ली, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर हमारी आवाज अब भी नहीं सुनी गई, तो आंदोलन और तेज होगा।”
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