लाल आतंक पर निर्णायक प्रहार, बस्तर में ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

बस्तर में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने 17 माओवादियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। वर्षों से भय और हिंसा का पर्याय बने इन माओवादियों का मुख्यधारा में लौटना प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिश्वास ने इस घटनाक्रम को “असंभव को संभव करने वाला कदम” बताते हुए कहा कि शासन की मजबूत इच्छाशक्ति और प्रभावी नीतियों के चलते ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने प्रशासन और सुरक्षा बलों को इस सफलता के लिए बधाई दी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। सरकार की पारदर्शी और संवेदनशील नीतियों ने भटके हुए लोगों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है।नीलेश बिश्वास ने विश्वास जताया कि बस्तर सहित पूरे प्रदेश में अब बंदूक की जगह विकास की आवाज गूंजेगी। माओवाद के खात्मे के साथ शांति, सुरक्षा और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा, जिससे छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की ओर अग्रसर होगा। बिलासपुर से

Mar 28, 2026 - 15:04
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