सेवा और आज्ञाकारिता से जीवन बनता है शक्तिशाली — ब्रह्माकुमार देवांग भाईजी
बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू राज से पधारे वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार देवांग भाई एवं ब्रह्माकुमार परमेश्वर भाई का ब्रह्माकुमारीज बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित ब्रह्माकुमार–ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों को संबोधित करते हुए जीवन में सेवा के महत्व को बताते हुए ब्रह्माकुमार देवांग भाई ने कहा कि सेवा केवल मंच पर दिखाई देने वाला कार्य नहीं है, बल्कि हर वह कर्म जो श्रेष्ठ भावना से किया जाए, वही सच्ची सेवा है। जब हम निस्वार्थ भाव से, बिना किसी अपेक्षा के सेवा करते हैं, तब स्वयं परमात्मा की दुआएँ हमारे जीवन को सहज रूप से शक्तिशाली बना देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि वरिष्ठों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और आज्ञाओं का पालन सेवा में दृढ़ता और सफलता का मूल आधार है। सेवा में ‘ना’ कहने की प्रवृत्ति हमें दुआओं से वंचित कर देती है, जबकि आज्ञाकारिता हमें श्रेष्ठ भाग्य का अधिकारी बनाती है। जैसे एक छोटा-सा बीज सही मिट्टी में बोया जाए तो वह विशाल वृक्ष बन जाता है, उसी प्रकार सेवा का एक छोटा कार्य भी यदि शुद्ध भावना से किया जाए, तो वह जीवन में बड़े परिवर्तन का कारण बनता है। सेवा हमें अहंकार से मुक्त कर नम्र बनाती है और नम्रता ही आत्मिक उन्नति का द्वार है। जब भावना सच्ची होती है, तो परिणाम स्वतः श्रेष्ठ निकलता है। उन्होंने सभी ब्रह्माकुमार–ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों को प्रेरित किया कि वे सेवा को बोझ नहीं, बल्कि सौभाग्य समझकर करें, क्योंकि सेवा के मार्ग पर चलने वाला आत्मा कभी खाली नहीं रहता। ब्रह्माकुमार परमेश्वर भाई ने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवा का वास्तविक आनंद तब मिलता है जब हम उसे बोझ नहीं, बल्कि सौभाग्य समझकर करते हैं। जब परिवार में या सेवाकेंद्र में हम बड़े-बुजुर्गों की कही बातों को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर अमल में लाते हैं, तो वातावरण में स्वतः ही सहयोग, स्नेह और सकारात्मकता का संचार होता है। यही सकारात्मकता आगे चलकर आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने यह भी कहा कि सेवा करते समय मन की शुद्धता और उद्देश्य की पवित्रता अत्यंत आवश्यक है, तभी सेवा फलदायी बनती है। इस अवसर पर सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने भी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था में सेवा केवल गतिविधि नहीं, बल्कि संस्कार है। स्वाति दीदी ने कहा कि जब हम सेवा को खुशी से करते हैं और आज्ञा को सम्मान समझते हैं, तब भीतर से ऐसी संतुष्टि मिलती है जो किसी भी बाहरी साधन से नहीं मिल सकती। उन्होंने बताया कि नकारात्मक सोच, शिकायत और तुलना हमारे खुशी के खजाने को खाली कर देती है, जबकि कृतज्ञता, स्वीकार्यता और सेवा उसे निरंतर भरती रहती है।
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