तीन माह से वेतन नहीं, तिफरा जोन में प्लेसमेंट कर्मचारियों की हड़ताल; निगम प्रशासन पर मनमानी के आरोप

"आज जोन बंद, कल जिला बंद" -वेतन भुगतान नहीं होने पर होगा आंदोलन -नंदकुमार कुशवाहा बिलासपुर। नगर निगम के जोन क्रमांक-2 तिफरा में मंगलवार को प्लेसमेंट कर्मचारियों ने वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल कर कामकाज ठप कर दिया। कर्मचारियों ने स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ नगर निगम प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नंदकुमार कुशवाहा के नेतृत्व में जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की। ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वे केजीएन कंपनी के ठेकेदार अमित चतुर्वेदी के अधीन कार्यरत थे। कंपनी का ठेका जनवरी माह में समाप्त हो चुका है, जिसके बाद से कर्मचारियों का वेतन अटक गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार काम करने के बावजूद उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय ने बताया कि निगम के ड्राइवरों सहित कई कर्मचारियों का भुगतान लंबित है। इसका मुख्य कारण संबंधित कंपनी का ठेका समाप्त होना है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के आवेदन को एमआईसी में भेज दिया गया है तथा नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित कंपनी को एक्सटेंशन देकर भुगतान कराने की कार्यवाही की जाएगी। वहीं, स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ नगर निगम प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नंदकुमार कुशवाहा ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों का वेतन पिछले तीन माह से लंबित है। इस संबंध में पूर्व में भी जोन कमिश्नर को आवेदन देकर अवगत कराया जा चुका था, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब जनवरी माह में ही प्लेसमेंट कंपनी का ठेका समाप्त हो गया था, तब कर्मचारियों के भुगतान की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की थी। अब हड़ताल के बाद एमआईसी की याद आना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। कुशवाहा ने आरोप लगाया कि केवल तिफरा जोन ही नहीं, बल्कि निगम के सभी आठों जोनों में कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आज जोन बंद है, आगे जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा कर कड़ा निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ के अखिल भारतीय महामंत्री सुरेश तिवारी ने भी प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि छोटे कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि पिछले तीन वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अधिकारियों को वापस भेजा जाए, क्योंकि वे यहां बैठकर मनमानी कर रहे हैं और कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कर्मचारियों की मेहनत पर भारी प्रशासनिक उदासीनता नगर निगम में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारी रोजमर्रा की व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इन्हें अपनी मेहनत की कमाई के लिए महीनों तक भटकना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि जहां एक ओर वे कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसे में निगम के उच्च अधिकारियों को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को राहत दिलाने की आवश्यकता है।

Jun 9, 2026 - 07:12
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