बच्चों के भविष्य से खिलवाड़! ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की मनमानी से मचा बवाल, शिकायत के बाद भी मालिक को क्लीन चिट?

नियमों को ठेंगा दिखाकर स्कूल में ही करा दी 5वीं-8वीं की बोर्ड परीक्षा, अब मासूमों पर दोबारा एग्जाम का खतरा बिलासपुर। शहर के व्यापार विहार स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की मनमानी ने सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने शासन के स्पष्ट आदेशों को दरकिनार करते हुए पांचवीं और आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा अपने ही स्कूल परिसर में आयोजित कर दी, जबकि नियमों के अनुसार । सी जी मान्यता प्राप्त इस स्कूल का यह परीक्षा बोर्ड के माध्यम से निर्धारित केंद्रों पर कराई जानी अनिवार्य है। स्कूल के संचालक प्रवीण अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख के दम पर नियमों को दरकिनार करते हुए यह कदम उठाया। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि बच्चों को दोबारा परीक्षा देने की नौबत आ सकती है, जिससे परिजनों में भारी आक्रोश है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन अब दोबारा परीक्षा को “ब्रेन टेस्ट” बताकर परिजनों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रिंसिपल एक-एक परिजन को केबिन में बुलाकर समझाने और मामला शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि बच्चों को फिर से बोर्ड परीक्षा देनी पड़ सकती है। आक्रोशित परिजनों ने कलेक्टर और DEO से की शिकायत सच्चाई सामने आने के बाद आक्रोशित परिजनों ने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से लिखित शिकायत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए एक टीम गठित की है और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की बात कही है। जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल हालांकि सूत्रों के मुताबिक जांच के बाद भी स्कूल संचालक प्रवीण अग्रवाल को क्लीन चिट मिलने की चर्चा तेज हो गई है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। रिश्तेदारी की चर्चा से बढ़ा संदेह इस विवाद के बीच एक और चर्चा शहर में तेजी से फैल रही है। बताया जा रहा है कि स्कूल संचालक प्रवीण अग्रवाल और जिला कलेक्टर एक ही समाज से आते हैं, और दोनों के बीच रिश्तेदारी होने की भी चर्चा है। ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या नियम तोड़ने के बावजूद स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई होगी या मामला प्रभाव के दबाव में दब जाएगा? गलती किसी की, सजा बच्चों को? सबसे ज्यादा चिंता उन 8 से 10 साल के मासूम बच्चों को लेकर है, जिन्हें शायद यह भी नहीं पता कि गलती किसकी है। अब उन्हीं बच्चों को दोबारा परीक्षा का मानसिक दबाव झेलना पड़ सकता है, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो सकती हैं। परिजनों का साफ कहना है कि “स्कूल की लापरवाही और मनमानी की सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए।” क्या कहता है नियम. ज्यादा फीस वसूली छत्तीसगढ़ में फीस नियमन अधिनियम (Fee Regulation Act) के तहत: स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकते फीस कमेटी की अनुमति जरूरी होती है उल्लंघन होने पर अतिरिक्त फीस वापस कराने का आदेश आर्थिक दंड मान्यता पर खतरा 4️⃣ गलत जानकारी देकर अभिभावकों को गुमराह करना यदि स्कूल CBSE का नाम लेकर एडमिशन देता है लेकिन मान्यता CG Board की है, तो यह धोखाधड़ी की श्रेणी में भी आ सकता है। संभावित कानूनी कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच मान्यता रद्द IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस भी बन सकता है ऐसे में देखना है कि इस पूरे मामले पर प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया होती हैं

Mar 14, 2026 - 22:37
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