शिक्षा विभाग में आदेशों की धज्जियां, सहायक ग्रेड-2 का तबादला आदेश बेअसर
बिलासपुर के शिक्षा विभाग में एक बार फिर अनुशासनहीनता और आदेशों की खुलेआम अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। विभाग में अंगद के पांव जमाकर बैठे कुछ कर्मचारी ऐसे हैं, जो वरिष्ठ अधिकारियों और शासन के आदेशों को भी ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला सहायक ग्रेड-दो विकास तिवारी से जुड़ा हुआ है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।मिली जानकारी के अनुसार कार्यालय कलेक्टर बिलासपुर द्वारा जारी स्थानांतरण नीति 2025 के तहत विकास तिवारी का प्रशासनिक तबादला जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर से शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लोहर्सी सोन, विकासखंड मस्तूरी किया गया था। तबादले के बाद विकास तिवारी ने अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, लेकिन तीन आईएएस अधिकारियों वाली वरिष्ठ सचिवों की समिति ने परीक्षण के बाद इस अभ्यावेदन को साफ तौर पर खारिज कर दिया।इसके बावजूद आरोप है कि विकास तिवारी ने न तो नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण किया और न ही विभाग को कोई सूचना दी। बताया जा रहा है कि वे आदेशों की अनदेखी करते हुए अपने निवास पर ही रह रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विकास तिवारी करीब 17 महीने तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहे थे। उस दौरान वे स्कूल में पदस्थ होने के बावजूद विद्यालय नहीं गए और बाद में पुनः जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आकर कार्य करने लगे। उस समय भी विभाग के भीतर नाराजगी और असंतोष की स्थिति बनी थी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलेक्टर बिलासपुर के आदेश और सचिव स्तर के फैसले की अवहेलना पर शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है। नियमों के मुताबिक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने और आदेश न मानने पर निलंबन, विभागीय जांच और सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान है।फिलहाल सभी की नजरें लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर और जिला शिक्षा अधिकारी पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है या फिर एक बार फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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