सिम्स में चार-पांच दिन से फ्लोराइड ट्यूब का संकट, शुगर जांच की सटीकता पर उठे सवाल
सर्जरी जैसे संवेदनशील मामलों में भी होती है ब्लड शुगर की जांच, मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल — जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल व्यवस्था बहाल करने की मांग बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में मरीजों की जांच व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में पिछले चार-पांच दिनों से फ्लोराइड ट्यूब (Fluoride Tube) उपलब्ध नहीं है। यह वही ट्यूब है जिसका उपयोग सामान्यतः रक्त में ग्लूकोज़ की जांच के लिए किया जाता है। बताया जा रहा है कि सिम्स में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों की ब्लड शुगर जांच होती है। खासकर ऑपरेशन और सर्जरी से जुड़े मामलों में मरीज के रक्त शर्करा स्तर की जानकारी चिकित्सकीय निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जांच के लिए आवश्यक सामग्री का लगातार उपलब्ध नहीं होना अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सर्जरी वाले मरीजों में अधिक संवेदनशील मामला सर्जरी से पहले और बाद में मरीज की शुगर की स्थिति जानना कई मामलों में उपचार की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यदि नियमित प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली फ्लोराइड ट्यूब उपलब्ध नहीं है और वैकल्पिक तरीके से जांच की जा रही है, तो उसकी सटीकता, प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त के नमूने को सही तरीके से संरक्षित नहीं किया गया तो ग्लूकोज़ के स्तर में बदलाव हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि इन दिनों सिम्स में शुगर की जांच किस वैकल्पिक व्यवस्था से की जा रही है और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रोटोकॉल अपनाया जा रहा है। ****जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी के बावजूद व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी? अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार फ्लोराइड ट्यूब की कमी की जानकारी संबंधित स्तर पर है। डॉ. मनीष कुमार की जिम्मेदारी से जुड़े इस विषय में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि कई दिनों से आवश्यक जांच सामग्री उपलब्ध नहीं है तो अब तक इसकी वैकल्पिक और स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? मामला केवल एक मेडिकल सामग्री की कमी का नहीं, बल्कि सैकड़ों मरीजों की जांच और उनकी उपचार प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। खासकर गंभीर बीमारी और सर्जरी वाले मरीजों के मामले में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। ***कलेक्टर और प्रशासन के प्रयासों के बीच स्थानीय व्यवस्था पर सवाल*** सिम्स में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आवश्यक जांच सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होना व्यवस्थागत विडंबना के रूप में सामने आ रहा है। ***स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल संज्ञान की मांग*** जनहित में मांग है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले का संज्ञान लेकर यह जांच कराएं कि: **सिम्स में फ्लोराइड ट्यूब की कमी कब से है? इसकी आपूर्ति में देरी का कारण क्या है? ***इस दौरान मरीजों की शुगर जांच किस माध्यम से की जा रही है? ***वैकल्पिक जांच की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है? ***सर्जरी वाले मरीजों की जांच में कोई जोखिम तो नहीं लिया जा रहा? ***आवश्यक मेडिकल सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है? मरीजों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय में तत्काल व्यवस्था बहाल करना और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराना जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा जिला प्रशासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर मरीजों के हित में आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।
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