बिलासपुर में प्रशासनिक लापरवाही: 22 मीटर का नाला सिमटकर बचा 7 मीटर, 10 हजार परिवारों पर बाढ़ का खतरा
यहाँ दी गई समाचार की जानकारी को एक नए, पेशेवर और आकर्षक **न्यूज़ रिपोर्ट / प्रेस रिलीज़** के रूप में तैयार किया गया है: --- # गोकने नाले पर अवैध कब्जे से 15 कॉलोनियों में मंडराया बाढ़ का खतरा, 10 हजार परिवार परेशान **बिलासपुर।** उसलापुर, गोकुलधाम से लेकर तिफरा क्षेत्र तक बहने वाले गोकने नाले पर बेखौफ अतिक्रमण के कारण जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। लगभग **22 मीटर चौड़ा गोकने नाला अवैध पाट-पटाई और कब्जों के चलते सिमटकर महज़ 7 मीटर** रह गया है। इसके कारण हर साल बारिश के मौसम में 15 से अधिक रिहायशी कॉलोनियों के लगभग 10,000 घरों में नाले का गंदा पानी घुस जाता है। --- ### **प्रमुख बिंदु:** * **100 से अधिक अवैध कब्जे दर्ज:** नगर निगम की नापजोख में नाले की ज़मीन पर 100 से अधिक अवैध निर्माण पाए गए हैं, लेकिन राजनीतिक संरक्षण और रसूखदारों के दबाव के कारण अब तक इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। * **सड़कें भी हुईं संकरी:** नाले के किनारे पाट-पटाई करने के कारण आसपास की सड़कें भी सिकुड़ गई हैं, जिससे आवागमन में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। * **आधी-अधूरी योजनाएं:** नाले को उसके मूल स्वरूप में लाने और डायवर्जन सीधा करने के लिए 'डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड' (DMF) से ₹18 लाख खर्च किए गए थे, लेकिन काम बीच में ही ठप पड़ गया। * **पलायन की मजबूरी:** हर मानसून में 3 से 5 दिनों तक घरों में पानी भरे रहने के कारण वैनर सिटी, साकेत होम, प्रगति विहार और उसलापुर क्षेत्र के रहवासियों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। --- ### **प्रशासनिक रुख:** मामले में अधिकारियों का कहना है कि गोकने नाले की वस्तुस्थिति और कब्जों की पूरी जानकारी जुटाकर जल्द ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और नाले को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू होगी। ---
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