बार-बार स्ट्रोक से जूझ रहे 70 वर्षीय मरीज को मिली राहत, सफल हुआ LAA क्लोजर
एट्रियल फाइब्रिलेशन और बार-बार ब्रेन स्ट्रोक की गंभीर समस्या से पीड़ित 70 वर्षीय मरीज श्री परमेश्वर श्रीवास का सफलतापूर्वक LAA क्लोजर किया गया। मरीज का उपचार वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एम. पी. समल के निर्देशन में किया गया। मरीज को पूर्व में तीन बार ब्रेन स्ट्रोक हो चुका था, जिससे उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी। क्या होता है ब्रेन स्ट्रोक? जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह अचानक रुक जाता है या रक्त वाहिका फट जाती है, तब स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न होती है। यदि यह समस्या बार-बार हो, तो उसे रेकरेंट स्ट्रोक कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्ट्रोक कैरोटिड स्टेनोसिस के कारण हो तो कैरोटिड स्टेंटिंग से उपचार किया जाता है। वहीं, अनियमित हृदय गति यानी एट्रियल फाइब्रिलेशन के कारण हृदय में बनने वाले रक्त के थक्के भी स्ट्रोक का बड़ा कारण बनते हैं। क्या है LAA क्लोजर? LAA क्लोजर एक आधुनिक हृदय प्रक्रिया है, जिसमें हृदय के लेफ्ट एट्रियल अपेंडेज हिस्से को विशेष डिवाइस के जरिए बंद किया जाता है, ताकि वहां रक्त के थक्के न बनें और स्ट्रोक का खतरा कम हो सके। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी मानी जाती है, जो लंबे समय तक ब्लड थिनर दवाइयों का सेवन नहीं कर सकते। यह उपचार बिना ओपन सर्जरी के, कैथेटर तकनीक के माध्यम से किया जाता है। डॉ. एम. पी. समल, डॉ. आकाश अग्रवाल और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक यह प्रक्रिया पूरी की। उपचार के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है तथा उन्हें बार-बार होने वाले स्ट्रोक के खतरे से राहत मिली है।
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