बोईदा सहित आसपास के गांवों में घर-घर जाकर बच्चों ने मांगा छेर छेरा
द्वारिका यादव कोरबा। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक पर्व छेरछेरा की इन दिनों ग्रामीण अंचलों में जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है। कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बोईदा सहित आसपास के गांवों में यह पर्व आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांवों की गलियों में छेरछेरा पर्व की रौनक दिखाई दी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चे, युवा और बुजुर्ग “छेरछेरा माई, कोठी के धान ला हेरा” के जयकारों के साथ घर-घर पहुंचे और अन्नदान लिया। ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुसार अन्नदान कर पुण्य लाभ अर्जित किया, जिससे गांवों में विशेष उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। छेरछेरा पर्व केवल अन्नदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, सहयोग और सामाजिक समरसता का मजबूत संदेश देता है। इस अवसर पर कई गांवों में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर वर्ग ने इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया और छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा। इस अवसर पर बलदेव जगत, राजकुमार मरावी, बसंत मरावी, राजकुमार पटेल,तुलाराम सिदार, द्वारिका यादव,केतन मरावी, उमाशंकर कंवर,सुधेश कंवर,मनीष मरावी,रामसिंह मरावी,गितेश जगत,अनिता मरावी,दिशा,पूर्वी,सवित्री मरावी,मधू मरावी,भोजराम जगत,हनुमान दास मानिकपुरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। छेरछेरा पर्व ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराएं आज भी समाज को जोड़ने और सामाजिक एकता का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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