भक्ति और उत्साह से संपन्न हुआ ‘श्री गुरु कृपा भक्त निवास’ की छत ढलाई कार्य, बुद्ध पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब
बिलासपुर/बेलगहना।बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री सिद्ध बाबा अद्वैत परमहंस आश्रम बेलगहना में आध्यात्म और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आश्रम परिसर में निर्माणाधीन ‘श्री गुरु कृपा भक्त निवास’ की छत ढलाई का महत्वपूर्ण कार्य भक्ति, उत्साह और जनसहयोग के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस पावन कार्य का संपादन श्री सिद्ध बाबा महाराज की कृपा तथा पूज्य स्वामी जी के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में किया गया। लंबे समय से प्रतीक्षित इस निर्माण कार्य में आज एक अहम उपलब्धि हासिल हुई, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। सुबह से ही आश्रम परिसर में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। विधि-विधान से पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और सद्गुरु के जयघोष के साथ कार्य का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, भक्त और सेवादार उपस्थित रहे, जिन्होंने श्रमदान और आर्थिक सहयोग के माध्यम से इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी निभाई। सेवा समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि ‘श्री गुरु कृपा भक्त निवास’ भविष्य में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख ठहराव स्थल बनेगा, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ सात्विक एवं आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि छत ढलाई जैसे कठिन कार्य को गुरु कृपा और जनसहयोग से निर्विघ्न पूरा किया गया। कार्य पूर्ण होने के उपरांत भक्तों के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया। निर्माण के अगले चरण में भवन की फिनिशिंग और आंतरिक साज-सज्जा का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा, ताकि इसे जल्द ही श्रद्धालुओं के उपयोग हेतु समर्पित किया जा सके। इस शुभ अवसर पर पूज्य स्वामी जी सभी भक्तों के साथ माँ नर्मदा आश्रम बरर नर्मदा कुंड पहुंचे, जहां पवित्र कुंड में स्नान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया गया। शास्त्रों के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन नर्मदा स्नान का विशेष महत्व होता है, जिससे अक्षय पुण्य और मन की शुद्धि की प्राप्ति होती है। इस पावन कुंड की विशेषता यह है कि इसमें गंगा नदी, सरयू नदी, यमुना नदी, कृष्णा नदी और कावेरी नदी सहित अनेक पवित्र नदियों का जल समाहित किया गया है। साथ ही भरत कूप से लाए गए पवित्र जल से भी इसका अभिषेक किया गया है। पूज्य स्वामी जी द्वारा इस पावन स्थल को “भक्तिमय मीराकुंड” नाम दिया गया है। यह कुंड आज श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां दूर-दूर से लोग स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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