छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा संभागीय न्यायिक सेमिनार आयोजित...वैधानिक प्रावधानों और स्थापित विधिक सिद्धांतों के मार्गदर्शन में ही न्यायिक विवेक का प्रयोग होना चाहिए : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा

बिलासपुर - बिलासपुर संभाग के न्यायिक अधिकारियों हेतु एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय परिसर, बिलासपुर स्थित नवीन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। सेमिनार में बिलासपुर संभाग के पाँच सिविल जिलों—बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा एवं मुंगेली से कुल 119 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य न्यायाधीश एवं अकादमी के संरक्षक रमेश सिन्हा ने दीप प्रज्वलन कर सेमिनार का शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू,न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी,न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु एवं न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीशगण, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने अपने प्रेरक एवं सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि “वैधानिक प्रावधानों और कानून के स्थापित सिद्धांतों के मार्गदर्शन में न्यायिक विवेक का प्रयोग किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि ऐसे संभागीय सेमिनार विचारण न्यायालयों के समक्ष प्रायः उत्पन्न होने वाले विषयों पर केंद्रित एवं सार्थक विचार-विमर्श का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विधि एवं प्रक्रिया की गहन समझ विकसित करना तथा जमीनी स्तर पर न्यायिक कार्य की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना न्याय वितरण प्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुख्य न्यायाधीश ने न्याय वितरण प्रणाली के मूलभूत सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि जहाँ मूल विधि नागरिकों के अधिकारों एवं दायित्वों को परिभाषित करती है, वहीं प्रक्रिया विधि उन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन का माध्यम है। प्रक्रिया संबंधी नियमों को मात्र तकनीकी औपचारिकताओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे न्यायिक कार्यवाही में निष्पक्षता, एकरूपता एवं निश्चितता सुनिश्चित करने हेतु सुविचारित ढंग से निर्मित किए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग सतर्कता, संवेदनशीलता एवं संवैधानिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ करें, ताकि न्याय न केवल प्रभावी रूप से प्रदान हो, बल्कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी भी प्रतीत हो। उन्होंने विधि के अनुप्रयोग में एकरूपता एवं स्थापित विधिक सिद्धांतों के पालन को जनविश्वास सुदृढ़ करने का आधार बताया।इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की नव परिवर्तित आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया। आधुनिक एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस से युक्त इस वेबसाइट के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों, न्यायिक शिक्षा पहलों, प्रकाशनों एवं अकादमी की संस्थागत गतिविधियों से संबंधित जानकारी की सहज एवं त्वरित पहुँच सुनिश्चित होगी। सेमिनार के दौरान जमानत में समानता के सिद्धांत, धारा 138 एनआई एक्ट की प्रक्रिया एवं डिक्री निष्पादन, उत्तराधिकार कानून, आदिवासी रूढ़िगत विधि की प्रासंगिकता तथा वसीयत के वैधानिक निष्पादन एवं साक्ष्य मूल्य जैसे महत्वपूर्ण विधिक विषयों पर प्रस्तुतीकरण एवं विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर द्वारा तथा परिचयात्मक वक्तव्य अकादमी के निदेशक द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारीगण तथा बिलासपुर संभाग के न्यायिक अधिकारी, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।

Feb 14, 2026 - 22:13
 0  2
💬 WhatsApp पर शेयर करें
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा संभागीय न्यायिक सेमिनार आयोजित...वैधानिक प्रावधानों और स्थापित विधिक सिद्धांतों के मार्गदर्शन में ही न्यायिक विवेक का प्रयोग होना चाहिए : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0