जाब सियासत: क्या 2027 चुनाव से पहले फिर जुड़ेगी SAD-BJP की राहें?
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फिर से साथ आने की चर्चाएं एक बार फिर गर्म हैं। संगरूर में एक जनसभा के दौरान अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल ने दोनों पार्टियों के संभावित गठबंधन पर सीधा इनकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बीजेपी और अकाली दल के बीच कोई सहमति बनती है, तो इसकी आधिकारिक जानकारी जल्द साझा की जाएगी। **गठबंधन की अटकलों की मुख्य वजहें** * **पीएम मोदी से मुलाकात:** अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने हाल ही में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की थी, जिसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में पुनर्गठबंधन की खबरें तैरने लगी थीं। * **केंद्र से बेहतर समन्वय:** हरसिमरत कौर ने राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने को जरूरी बताया। उन्होंने अपने पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र के सहयोग से पंजाब को आर्थिक और विकास के स्तर पर हमेशा लाभ मिला है। * **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** कृषि कानूनों के विरोध में 2020 में नाता तोड़ने से पहले, बीजेपी और SAD का दशकों पुराना मजबूत गठबंधन रहा है और दोनों ने मिलकर राज्य में कई बार सरकार चलाई है। **AAP सरकार और विपक्ष पर निशाना** * **दिल्ली से रिमोट कंट्रोल का आरोप:** आम आदमी पार्टी की वर्तमान पंजाब सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की सत्ता दिल्ली के इशारों पर चलाई जा रही है, जिससे पंजाब के युवाओं और राज्य के भविष्य को नुकसान पहुंच रहा है। * **नांदेड़ घटना पर प्रतिक्रिया:** सुखबीर सिंह बादल पर नांदेड़ में हुए हमले को उन्होंने कायरतापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारों जैसे पवित्र स्थलों पर हमले की साजिश रचने वाली ताकतों से अकाली दल मजबूती से लड़ेगा। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हरसिमरत कौर के रुख ने 2027 से पहले पंजाब के नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत जरूर दे दिए हैं।
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