OBC क्रीमी लेयर विवाद: केंद्र की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली तुरंत राहत
सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के एक फैसले को लेकर OBC क्रीमी लेयर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने 25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले पर स्पष्टीकरण और बदलाव की मांग की है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने सरकार को कोई तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। **मामले की मुख्य बातें:** * **11 मार्च का फैसला:** जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आर. महादेवन की पीठ ने कहा था कि PSU, बैंकों या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की सिर्फ वेतन आय (सैलरी) के आधार पर उनके बच्चों को OBC आरक्षण से बाहर (क्रीमी लेयर घोषित) नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन माना था। * **केंद्र सरकार की चिंता:** सरकार का मानना है कि यदि आय के मानदंड को नजरअंदाज किया गया, तो इससे OBC नॉन-क्रीमी लेयर (OBC-NCL) की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इससे चपरासी, ड्राइवर या क्लर्क जैसे कर्मचारियों के बच्चों के हक और OBC-NCL बनाम EWS के अंतर पर व्यावहारिक सवाल खड़े हो जाएंगे। * **उम्मीदवारों पर असर:** यह मामला 2016 के बाद से सिविल सेवा परीक्षा में चयनित हुए लगभग 100 OBC उम्मीदवारों के दावों और आरक्षण के क्रियान्वयन से भी सीधे जुड़ा हुआ है। * **वर्तमान स्थिति:** CJI पीठ ने फिलहाल फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है। केंद्र ने 11 मार्च का फैसला सुनाने वाली बेंच के पुनर्गठन की मांग की है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
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