‘स्वीकृत राशि को घपला नहीं कह सकते, सेंट्रलाइज्ड टेंडर से हुई खरीदी’ — स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

बलरामपुर DEO मनीराम यादव को लेकर मंत्री का बड़ा बयान, कहा—आपसी द्वंद्व के कारण कुछ लोग उनके पीछे पड़े हैं बलरामपुर। जिला शिक्षा अधिकारी प्रभारी मनीराम यादव के विरुद्ध शैक्षणिक मदों की खरीदी में करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों के बीच अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव का बयान सामने आया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी राशि के स्वीकृत होने मात्र को घपला नहीं कहा जा सकता। वर्तमान में खरीदी की प्रक्रिया सेंट्रलाइज्ड टेंडर के माध्यम से होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी द्वंद्व के कारण कुछ लोग डीईओ मनीराम यादव के पीछे पड़े हुए हैं। मंत्री के इस बयान के बाद पूरे मामले में डीईओ को राहत मिलती नजर आ रही है। दरअसल, बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से विभिन्न शैक्षणिक सामग्रियों की खरीदी, आपूर्ति, वितरण, गुणवत्ता परीक्षण, भौतिक सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में की गई विभिन्न खरीदारियां ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से नियमानुसार किए जाने का दावा किया गया है। जानकारी के मुताबिक, साइकिलों की खरीदी संचालक लोक शिक्षण संचालनालय स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से हुई। खरीदी गई साइकिलें संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद गठित समिति द्वारा गुणवत्ता परीक्षण किया गया और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से संबंधित स्कूलों तक साइकिलें पहुंचाई गईं। पात्र विद्यार्थियों को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से साइकिलों का वितरण कराया गया। इसी तरह फर्नीचर की आपूर्ति संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं में कराई गई। सामग्री पहुंचने के बाद संस्थाओं से पावती ली गई और उपलब्ध फर्नीचर का गुणवत्ता परीक्षण भी कराया गया। गुणवत्ता एवं आपूर्ति संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित फर्मों को ट्रेजरी के माध्यम से भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है। साइंस किट की खरीदी भी राज्य स्तर से डायरेक्टरेट के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत की गई। संबंधित फर्म द्वारा संस्थानों में साइंस किट की आपूर्ति की गई। प्राप्ति पावती के बाद टीम के माध्यम से सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण एवं फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित सामग्री का भुगतान जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं स्वच्छता सामग्री की खरीदी भी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई। सप्लायर द्वारा संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बाद स्टॉक में एंट्री कर सामग्री को संबंधित स्कूलों में वितरित कराया गया। वितरण एवं स्टॉक संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित फर्म को भुगतान किया गया। 45.16 करोड़ के भुगतान पर डीईओ ने रखा अपना पक्ष वर्ष 2025-26 में किए गए क्रय के भुगतान की कुल राशि 45,166,159 रुपये को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर डीईओ मनीराम यादव ने भी अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार जांच दल द्वारा इस राशि को कथित रूप से शासकीय राशि के गबन से जोड़कर बताया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गबन किए जाने संबंधी खबरें सामने आईं। डीईओ का कहना है कि शासकीय भुगतान जिला कोषालय अधिकारी द्वारा परीक्षण के पश्चात ही किया जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जांच दल में जिला कोषालय अधिकारी भी सदस्य हैं। ऐसे में यदि शासकीय राशि के गलत भुगतान का सवाल उठता है तो पूरी भुगतान प्रक्रिया की भी जांच होना आवश्यक है। मनीराम यादव के अनुसार अधिकांश सामग्रियों का क्रय आदेश शासन स्तर से स्वीकृत किया गया था। सामग्री प्राप्त होने के बाद पावती, भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त किए गए और नियमानुसार भुगतान हेतु देयक जिला कोषालय कार्यालय बलरामपुर को भेजे गए। उन्होंने कहा कि जिला कोषालय द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के छोटे-छोटे स्वत्वों के भुगतान में भी कई बार आपत्तियां लगाई जाती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी शासकीय राशि के भुगतान के दौरान भी निर्धारित स्तर पर परीक्षण किया गया होगा। जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं डीईओ मनीराम यादव ने कहा है कि उन्होंने जांच दल को क्रय से संबंधित समस्त नस्तियां मूल रूप में उपलब्ध कराई थीं। जांच प्रतिवेदन में लगाए गए आरोपों का वे कलेक्टर के समक्ष अभिलेखों सहित समाधानकारक उत्तर प्रस्तुत करेंगे। फिलहाल मामले में आरोपों की आधिकारिक और अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने और सक्षम स्तर से अंतिम निष्कर्ष सामने आने से पहले डीईओ मनीराम यादव को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। प्रशासनिक कसावट से भी बढ़ी चर्चा इधर विभागीय जानकारों का कहना है कि डीईओ मनीराम यादव द्वारा जिले की शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, नियमित मॉनिटरिंग और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक प्रशासनिक निगरानी बढ़ने से विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था में सुधार देखने को मिला है। कई मामलों में लोग सीधे जिला शिक्षा अधिकारी से मिलकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं और समाधान भी हो रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका सीमित होने की चर्चा है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर मंत्री का बयान और डीईओ का पक्ष सामने आने के बाद अब निगाहें जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं। दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खरीदी एवं भुगतान में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

Aug 26, 2026 - 16:18
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