**छत्तीसगढ़ में जैविक क्रांति: GPM के 160 गांवों में बने 'जीवामृत मॉडल फार्म', धान की फसल में दिख रहा चमत्कारिक असर**
**छत्तीसगढ़: GPM जिले की 160 पंचायतों में जैविक खेती की नई पहल, 'जीवामृत मॉडल फार्म' से किसानों को मिल रही सीख** **रायपुर:** रासायनिक उर्वरकों और महंगे कीटनाशकों से बढ़ती कृषि लागत को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले की 171 में से 160 ग्राम पंचायतों में 'जीवामृत मॉडल फार्म' स्थापित किए गए हैं। कृषि विभाग इन मॉडल फार्मों के जरिए किसानों को प्रत्यक्ष अनुभव दे रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों को लाकर इन खेतों का भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे वे जैविक तरीकों के सकारात्मक परिणामों को खुद देख सकें। **प्रशिक्षण और 22 दिनों में फसल पर असर** हाल ही में गौरेला विकासखंड में आयोजित व्यावहारिक प्रशिक्षण शिविर में किसानों को मृदा परीक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने और जीवामृत तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण के बाद किसानों को स्थानीय कृषक बृजलाल राठौर के खेत का दौरा कराया गया, जहां 'म्यूटेंट विष्णुभोग' किस्म के धान में जीवामृत का प्रयोग किया गया है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, रोपाई के महज 22 दिनों के भीतर ही फसल में उत्कृष्ट वृद्धि और विशेष सुगंध देखी गई। सबसे खास बात यह रही कि फसल पूरी तरह से कीटों और बीमारियों से मुक्त पाई गई। **मॉडल फार्म बनेंगे 'लर्निंग सेंटर'** कृषि विभाग का मानना है कि केवल मौखिक जानकारी देने के बजाय जब किसान साथी किसानों के खेतों में तकनीक के प्रत्यक्ष परिणाम देखते हैं, तो उनका विश्वास बढ़ता है। इसी सोच के साथ इन 160 मॉडल फार्मों को प्रैक्टिकल लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। GPM जिले का यह अभियान राज्य में प्राकृतिक खेती को मजबूत करने और किसानों की लागत घटाकर बेहतर उत्पादन हासिल करने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
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