**सलाखों के पीछे मानवता की रोशनी: रायपुर सेंट्रल जेल में कैदियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प**
**रायपुर जेल में 41वें नेत्रदान पखवाड़े का आगाज़: कैदियों और जेलकर्मियों ने लिया नेत्रदान का संकल्प** **25 अगस्त, रायपुर:** रायपुर की केंद्रीय जेल में मंगलवार को राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान जेल के कैदियों का निःशुल्क नेत्र परीक्षण किया गया, साथ ही जिले में 41वें 'नेत्रदान पखवाड़े' की आधिकारिक शुरुआत भी हुई। 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलने वाले इस देशव्यापी अभियान का उद्देश्य लोगों में मरणोपरांत नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। **नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों पर डॉक्टर का स्पष्टीकरण** जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि नेत्रदान मानवता की सेवा का सर्वोपरि माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्र, लिंग, धर्म या ब्लड ग्रुप की सीमाओं से परे कोई भी व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प ले सकता है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मुकेश भगत ने बताया कि नेत्रदान मुख्य रूप से कॉर्निया से पीड़ित दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजाला लाता है। * **प्रक्रिया का समय:** मृत्यु के बाद यह प्रक्रिया केवल 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है। * **चेहरे की बनावट:** कॉर्निया निकालने से मृत व्यक्ति के चेहरे पर कोई विकृति या निशान नहीं आता। **कैदियों की हुई जांच, डॉक्टरों की टीम रही तैनात** स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेल में बंदियों की आंखों की विस्तृत जांच की और उन्हें दृष्टि सुरक्षा से जुड़े जरूरी परामर्श दिए। इस दौरान पुरुष व महिला खंडों में जांच के लिए डॉ. मुकेश भगत, डॉ. टिकेश्वर, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. आकांक्षा तथा नेत्र चिकित्सा सहायक अधिकारी संजय शर्मा, आर.पी. यादव, प्रकाश राठौर, ललित पाटकर, अशोक श्रीवास और प्रवीण शर्मा समेत कई चिकित्सक उपस्थित रहे। **नेत्रदान का लिया संकल्प** कार्यक्रम के अंत में कैदियों और जेल अधिकारियों-कर्मचारियों ने मरणोपरांत नेत्रदान करने की शपथ ली। साथ ही, उन्होंने अपने परिवारों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करने की बात कही। 8 सितंबर तक चलने वाले इस पखवाड़े का मुख्य ध्यान नेत्र बैंकिंग और कॉर्निया ट्रांसप्लांट सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर रहेगा।
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