पर्यावरण एवं गौ संरक्षण के लिए कपिला गौ सेवा संस्थान की अनूठी पहल
बिलासपुर शहर में पर्यावरण संरक्षण और गौसंवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कपिला गौ सेवा संस्थान द्वारा एक विशेष पहल शुरू की गई है। इस अभियान के तहत होलिका दहन में लकड़ी के स्थान पर देशी गाय के गोबर से बने कंडों के उपयोग का आह्वान किया गया है। संस्थान की इस पहल को बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी का समर्थन प्राप्त हुआ है। महापौर ने शहर के सभी आठों जोन के पार्षदों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे होलिका दहन में गोबर के कंडों का उपयोग करें तथा दहन के बाद बची राख को मिट्टी में मिलाकर उसकी उर्वरक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, इस पहल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने का भी आग्रह किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग प्रेरित हो सकें। संस्थान की अध्यक्ष क्षमा सिंह ने बताया कि सभी आठों जोन के अधिकारियों से मुलाकात कर लगभग 70 पार्षदों के वार्डों में कंडे, पूजन सामग्री एवं जन-जागरूकता पैम्फलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि होलिका दहन के पश्चात शहर के मुक्तिधामों में शवदाह के लिए भी कंडों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लकड़ी की खपत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। विश्व हिंदी परिषद की प्रदेश अध्यक्ष संगीता बनाफर ने कहा कि गौवंश भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धरोहर है। मशीनीकरण के कारण बैलों की आवश्यकता कम होने से गौवंश सड़कों पर आ जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं और परिवारों को अपनों की क्षति झेलनी पड़ती है। संस्था की सदस्य प्रेमलता विन्ध्यराज ने सामाजिक सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार गौशालाओं से जुड़ना चाहिए। चारा दान, सेवा कार्य या आर्थिक सहयोग जैसी छोटी-छोटी पहलें भी गौ संरक्षण को मजबूत बना सकती हैं। वहीं आर.एस. विन्ध्यराज ने बताया कि गौ संरक्षण से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है। संस्थान द्वारा वितरित पैम्फलेट में गोबर के कंडों की उपयोगिता, जैविक खेती में उनके महत्व और पर्यावरणीय लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई है। संस्था का मानना है कि गौ आधारित कृषि पद्धति भूमि, जल और वायु की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है। संस्थान ने “गौ संरक्षण से ही संभव है पर्यावरण का संतुलन” का संदेश देते हुए ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार सृजन पर भी बल दिया है। ‘एकल गौ ग्राम योजना’ के माध्यम से महिलाएं गोबर से दीपक, धूपबत्ती और अन्य उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। कपिला गौ सेवा संस्थान की यह पहल न केवल धार्मिक परंपराओं से जुड़ी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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