शिक्षा के मंदिर में श्रम का शोषण,शिक्षकों की लापरवाही उजागर
पाली। ग्रामीण वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन जब शिक्षण संस्थानों में ही बच्चों के अधिकारों का हनन होने लगे, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसा ही एक चिंताजनक मामला पाली विकास खंड के ग्राम सफलवा के आश्रित मोहल्ला राहा में संचालित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला से सामने आया है, जहाँ शिक्षा की जगह बच्चों से श्रमिक कार्य कराया जा रहा है।जानकारी के अनुसार, विद्यालय में पदस्थ एक शिक्षिका प्रतिदिन की तरह दोपहर 3 बजे ही स्कूल छोड़कर बिना किसी सूचना के गायब हो गईं। वहीं विद्यालय में मौजूद दूसरे शिक्षक द्वारा बच्चों से बाल्टी में पानी भरवाने, अपने कक्ष की साफ-सफाई कराने जैसे कार्य कराए जा रहे थे। यह पूरा घटनाक्रम हमारे पाली मीडिया प्रतिनिधि ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया।जब इस गंभीर विषय पर संबंधित शिक्षक से सवाल किए गए, तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकारने के बजाय मीडिया से अभद्र व्यवहार किया। शिक्षक ने स्कूल में कैसे आ गए,किसने अनुमति दी जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए पत्रकारिता की मर्यादा और जवाबदेही दोनों को ठेस पहुँचाई।यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को उजागर करती है। जिन बच्चों को किताब, कलम और ज्ञान मिलना चाहिए, उन्हें श्रम के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह न केवल बाल अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी शिक्षकों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो “शिक्षा का मंदिर” कहलाने वाले विद्यालयों की गरिमा लगातार धूमिल होती।
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