अपोलो अपडेट 1.0 में जुटे 130 से अधिक चिकित्सक, आधुनिक चिकित्सा की नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर हुआ मंथन

अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के भव्य क्लिनिकल अपडेट कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव, चिकित्सा क्षेत्र की नवीनतम प्रगतियों पर हुई विस्तृत चर्चा बिलासपुर, 31 मई 2026। चिकित्सा विज्ञान में हो रहे नवीनतम शोध, तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों को चिकित्सकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर द्वारा “अपोलो अपडेट 1.0” का सफल आयोजन किया गया। इस व्यापक वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम में शहर एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र के 130 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लेकर चिकित्सा क्षेत्र की नवीनतम जानकारियों से स्वयं को अपडेट किया। कार्यक्रम का आयोजन अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर के यूनिट हेड अभय के. गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। यह आयोजन क्षेत्र के प्रमुख सतत चिकित्सा शिक्षा (Continuing Medical Education) कार्यक्रमों में शामिल रहा, जिसमें बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में आपातकालीन चिकित्सा में बेहोशी (Loss of Consciousness) का प्रबंधन, चेस्ट ट्रॉमा, ब्रेन एसओएल, बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH), त्वचा रोगों में नवीन प्रगति, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज, एटिपिकल चेस्ट पेन, ईयूएस-गाइडेड टिश्यू एक्विजिशन, क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन एवं एनोरेक्टल मैनोमेट्री, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, किडनी प्रत्यारोपण, अल्कोहोलिक हेपेटाइटिस, मधुमेह प्रबंधन तथा वैस्कुलर रोगों सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विषय पर डॉ. अभिषेक कौशले ने IVUS, OCT एवं रोटाब्लेशन जैसी आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इनसे जटिल हृदय रोगों का अधिक सटीक एवं सुरक्षित उपचार संभव हो रहा है। वहीं डॉ. अमोल पाडेगांवकर ने सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि कैंसर सर्जरी में यह तकनीक बेहतर परिणाम देने में सहायक सिद्ध हो रही है। किडनी प्रत्यारोपण पर डॉ. विनय कुमार ए.वी. ने रीनल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया, दाता चयन एवं प्रत्यारोपण पश्चात देखभाल की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने इसे अंतिम चरण की किडनी विफलता से जूझ रहे मरीजों के लिए सबसे प्रभावी उपचार विकल्प बताया। दोपहर में आयोजित पैनल चर्चा में अल्कोहोलिक हेपेटाइटिस एवं ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी (DILI) ओवरलैप पर विशेषज्ञों ने रोग के सटीक निदान एवं प्रभावी उपचार रणनीतियों पर चर्चा की। वहीं केस आधारित चर्चा सत्र में जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं सर्जिकल मामलों का विश्लेषण करते हुए बहु-विषयक उपचार पद्धति की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दोपहर बाद आयोजित सत्र में डॉ. सुनद एम. ने “इंसुलिन से आगे : मेटाबोलिक थेरेप्यूटिक्स का युग” विषय पर व्याख्यान देते हुए GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट्स एवं SGLT2 इनहिबिटर्स जैसी नई दवाओं की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि आधुनिक मधुमेह उपचार अब केवल ब्लड शुगर नियंत्रण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हृदय, किडनी एवं संपूर्ण मेटाबोलिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर भी केंद्रित है। डॉ. अरिहंत जैन ने मधुमेह प्रबंधन में योग एवं आध्यात्मिकता की भूमिका को रेखांकित करते हुए तनाव नियंत्रण और सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। वहीं डॉ. शिशिर जायसवाल ने वैस्कुलर रोगों के आधुनिक निदान एवं उपचार तकनीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंतिम वैज्ञानिक व्याख्यान में डॉ. कल्पना दास ने “डायबिटीज मैनेजमेंट 2026 : वास्तव में क्या बदला है?” विषय पर चर्चा करते हुए सतत ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM), टाइम-इन-रेंज अवधारणा और तकनीक आधारित उपचार पद्धतियों को मधुमेह देखभाल की नई दिशा बताया। कार्यक्रम की विशेष आकर्षण बहु-विषयक पैनल चर्चाएं रहीं, जिनमें प्रतिभागी चिकित्सकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने क्लिनिकल अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने ऐसे आयोजनों को चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय, नवाचार एवं बेहतर रोगी देखभाल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के साथ अपोलो हॉस्पिटल्स बिलासपुर ने एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

May 31, 2026 - 22:49
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