खबर का असर: PM आवास घोटाले की जांच शुरू, दो अधिकारियों की टीम गठित... लेकिन उठ रहे बड़े सवाल!

सीईओ ने तकनीकी सहायक पर जताया भरोसा, फिर आवास मित्र के आरोप और निरीक्षण की जिम्मेदारी पर क्यों घिरा विभाग? बिलासपुर/बेलतरा। प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं और अधूरे निर्माणों को पूर्ण बताकर भुगतान किए जाने के मामले में प्रकाशित खबर का असर दिखाई देने लगा है। जनपद पंचायत बिल्हा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा मामले की जांच के लिए दो अधिकारियों की टीम गठित कर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार सहायक परियोजना अधिकारी (आवास) नंदकिशोर सिंह एवं तकनीकी सहायक (आवास) विकास राठौर को शिकायत की जांच कर दो दिवस के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में ग्राम पंचायत जलसों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे आवासों को पूर्ण दर्शाकर राशि जारी करने तथा निरीक्षण और जियो टैगिंग में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर जनपद पंचायत बिल्हा के सीईओ कुमार सिंह ने तकनीकी सहायक पिंकी राठौड़ का बचाव करते हुए कहा कि "वह इस प्रकार का कार्य नहीं कर सकतीं, मुझे उन पर पूरा विश्वास है। आवास मित्र द्वारा लगाया गया आरोप गलत है।" हालांकि इस बयान के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। वायरल ऑडियो में आवास मित्र परमार्थ खरे कथित रूप से यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने जो कुछ किया, वह तकनीकी सहायक के कहने पर किया। यदि यह दावा गलत है तो जांच में इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं यदि आरोपों में कोई तथ्य नहीं है तो फिर अधूरे निर्माणों और कथित तौर पर गलत जियो टैगिंग की जिम्मेदारी आखिर किसकी बनती है? सबसे बड़ा सवाल तकनीकी सहायक की भूमिका को लेकर उठ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण कार्यों का निरीक्षण, प्रगति का सत्यापन, तकनीकी परीक्षण तथा जियो टैगिंग प्रक्रिया की निगरानी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल मानी जाती है। ऐसे में यदि वास्तव में केवल नींव या अपूर्ण निर्माण वाले आवासों पर भुगतान हुआ है, तो क्या यह निरीक्षण व्यवस्था की विफलता नहीं है? और यदि तकनीकी सहायक की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, तब भी क्या इसे अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही के रूप में देखा जाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल आवास मित्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भुगतान प्रक्रिया, निरीक्षण रिपोर्ट, जियो टैगिंग रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि ग्राम जलसों में ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं। अब सबकी निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट तय करेगी कि आवास मित्र के आरोपों में कितना दम है, तकनीकी सहायक की भूमिका क्या रही और आखिर गरीबों के लिए बनी प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं का जिम्मेदार कौन है।

Jun 8, 2026 - 09:27
 0  48
💬 WhatsApp पर शेयर करें
खबर का असर: PM आवास घोटाले की जांच शुरू, दो अधिकारियों की टीम गठित... लेकिन उठ रहे बड़े सवाल!

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0