छत्तीसगढ़ में शिक्षकों का हल्लाबोल: TET अनिवार्यता के खिलाफ बारिश में निकाली 'TET मुक्ति रैली', 5 सूत्रीय मांगों पर अड़े
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों का विरोध-प्रदर्शन अब आक्रामक रूप ले चुका है। **शिक्षक संघर्ष मोर्चा** के बैनर तले प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर ‘TET मुक्ति रैली’ का आयोजन किया गया। मूसलाधार बारिश के बावजूद भारी संख्या में शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और DPI के नाम जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का तर्क है कि 20 से 28 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अब TET पास करने की शर्त थोपना पूरी तरह से अनुचित है। वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करने से उनके मन में नौकरी की सुरक्षा को लेकर भारी तनाव और डर का माहौल बन गया है, जिससे उनकी शिक्षण क्षमता भी प्रभावित हो रही है। **शिक्षक संघर्ष मोर्चा की 5 प्रमुख मांगें:** * **TET अनिवार्यता की समाप्ति:** पुराने शिक्षकों के लिए TET की बाध्यता खत्म की जाए (सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत इसे केवल नई भर्तियों पर लागू किया जाए)। * **पुराणी सेवा की गणना:** संविलियन से पूर्व दी गई सेवा अवधि को जोड़कर पेंशन सहित सभी लाभ दिए जाएं। * **वेतन विसंगति का समाधान:** केंद्रीय वेतनमान लागू करते हुए विभिन्न शिक्षक संवर्गों के वेतन अंतर को दूर किया जाए। * **B.Ed प्रशिक्षण:** D.Ed धारक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराकर B.Ed की योग्यता प्रदान की जाए। * **नियम निरस्तीकरण:** भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2026 को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। रायपुर में मोर्चे के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे व केदार जैन और बिलासपुर में संजय शर्मा के नेतृत्व में यह प्रदर्शन संपन्न हुआ। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि बेहतर शिक्षा प्रणाली के लिए शिक्षकों को भयमुक्त वातावरण मिलना जरूरी है, इसलिए सरकार को इन मांगों पर जल्द ठोस निर्णय लेना होगा।
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