सड़क पर जन्मदिन का जश्न, आतिशबाजी और रीलबाजी! नायब तहसीलदार के वायरल वीडियो से प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल
हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद सड़क पर केक काटने और जश्न मनाने का आरोप, अब जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की मांग रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों के कंधों पर है, जब उन्हीं अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठने लगें, तो प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस होना लाजिमी है। रायपुर में नायब तहसीलदार विपिन पटेल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ऐसा ही मामला चर्चा में है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर नायब तहसीलदार विपिन पटेल बीच सड़क पर गाड़ी रोककर जन्मदिन का केक काटते और सलमान खान की फिल्म के चर्चित गाने 'ओ ओ जाने जाना' पर रील बनाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान आतिशबाजी किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी नहीं थम रहा सड़क पर जश्न! गौरतलब है कि सार्वजनिक सड़कों पर केक काटने और जश्न मनाने जैसी गतिविधियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहले ही सख्त रुख जता चुका है। ऐसे में जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी से जुड़े इस वायरल वीडियो ने प्रशासनिक अनुशासन और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब आम नागरिकों को यातायात नियमों का पालन करने और सार्वजनिक मार्गों को बाधित नहीं करने की हिदायत दी जाती है, तो क्या सरकारी पद पर बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी अधिक नहीं होनी चाहिए? सड़क आम जनता की आवाजाही के लिए है या जन्मदिन की पार्टी, आतिशबाजी और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने का मंच? अब प्रशासन की परीक्षा, क्या होगी निष्पक्ष जांच? इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा या नहीं। क्या वीडियो की सत्यता की जांच होगी? क्या सड़क पर यातायात बाधित करने और आतिशबाजी किए जाने के पहलुओं की पड़ताल होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी? यह मामला केवल एक जन्मदिन की पार्टी या रील बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी पद की गरिमा, प्रशासनिक अनुशासन और कानून के समान अनुपालन से जुड़ा है। अधिकारियों से जनता नियमों के पालन की अपेक्षा करती है। इसलिए जरूरी है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच हो और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए। अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के रुख पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि नियमों का पालन कराने वाले अधिकारियों के लिए भी वही नियम लागू होंगे, जो आम नागरिकों के लिए हैं, या फिर यह मामला सोशल मीडिया की सुर्खियां बनकर रह जाएगा? बड़ा सवाल: कानून सबके लिए समान है, तो कार्रवाई में भी समानता कब दिखाई देगी?
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