RTI पर बड़ा सवाल: “देश में लागू सूचना का अधिकार, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड ) ने खुद को बताया कानून से बाहर!”
बिलासपुर। देशभर में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 को पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों के अधिकांश विभागों में इस कानून का पालन किया जा रहा है, लेकिन बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के जिला कार्यालय से आया एक जवाब अब कई सवाल खड़े कर रहा है। सूचना मांगने वाले आवेदको को जिला विपणन अधिकारी कार्यालय की ओर से पत्र जारी कर कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, जिला कार्यालय बिलासपुर "लोक प्राधिकारी (Public Authority)" नहीं है और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के दायरे से बाहर है, इसलिए मांगी गई जानकारी देने के लिए विभाग बाध्य नहीं है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि मुख्यालय रायपुर के वर्ष 2015 के एक आदेश के आधार पर कार्यालय खुद को RTI के दायरे से बाहर बता रहा है और आवेदक का आवेदन तथा पोस्टल ऑर्डर वापस लौटाया जा रहा है। अब इस जवाब ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब देशभर में सरकारी योजनाओं, सरकारी सहायता प्राप्त संस्थाओं और सहकारी संस्थाओं तक में RTI लागू होने के उदाहरण मौजूद हैं, तो फिर आखिर मार्कफेड जैसी संस्था खुद को इस कानून से बाहर कैसे बता सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई संस्था सरकारी नियंत्रण, वित्तीय सहायता या प्रशासनिक निगरानी में संचालित हो रही है, तो उसकी स्थिति को लेकर कानूनी परीक्षण संभव है। ऐसे में यह मामला अब केवल सूचना न देने का नहीं, बल्कि RTI कानून की व्याख्या और पारदर्शिता के अधिकार से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या एक विभागीय आदेश सूचना का अधिकार जैसे केंद्रीय कानून से ऊपर हो सकता है? और यदि ऐसा है तो फिर आम नागरिकों के सूचना पाने के संवैधानिक अधिकार का क्या होगा? अब देखना होगा कि यह मामला सूचना आयोग तक पहुंचता है या संबंधित विभाग अपने रुख पर पुनर्विचार करता है। फिलहाल इस जवाब ने पारदर्शिता के दावों के बीच एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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