जिला चिकित्सालय की लापरवाही : बच्चेदानी की गंभीर बीमारी से तड़पती महिला की एक सप्ताह से अनदेखी, अस्पताल प्रबंधन व चिकित्सकों का गैर- जिम्मेदाराना रवैया

कोरबा : जिला चिकित्सालय में त्वरित एवं आवश्यक उपचार के ढिंढोरा पीटे जाने के पीछे बच्चेदानी की गंभीर बीमारी से एक सप्ताह से तड़पती भर्ती महिला की अनदेखी की खबर सामने आयी है, जहां के चिकित्सकों द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण मरीज को असहनीय पीड़ा सहनी पड़ रही है। यह चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती है, जहां त्वरित इलाज के अभाव में मरीज को कष्ट झेलना पड़ रहा है तो वहीं ऐसी लापरवाही मरीजों के लिए मानवाधिकारों के उल्लंघन और असुरक्षित चिकित्सा स्थिति के समान है, जो इलाज के प्रति गैर- जिम्मेदाराना रवैया को दर्शाता है। जिले के ग्राम कुमगरी निवासी 45 वर्षीय गरीब महिला छतबाई पति परदेशी दास पिछले एक माह से पेट में दर्द की समस्या से परेशान है। परिजन द्वारा प्रारंभिक स्थानीय स्तर पर डॉक्टर से उपचार कराया गया लेकिन कोई राहत न मिलने से शहर के एक निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां डॉक्टरी परीक्षण उपरांत पता चला कि महिला के बच्चेदानी में बड़ा गठान है। चिकित्सकों ने मरीज के परिजन को बताया कि गठान बड़ा होने से कभी भी फूट सकता है, जो मरीज के लिए बेहद घातक है, वहीं बच्चादानी भी सिकुड़ने लगा है। चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी और जिसका 35 से 40 हजार खर्च बताया। गरीब परिवार के पास इतनी राशि की व्यवस्था संभव न हो पाने के कारण मरीज को गत 16 फरवरी, सोमवार को जिला अस्पताल लेकर गए, जहां मरीज को गायनिक वार्ड में भर्ती तो किया गया लेकिन उपचार के नाम पर परिजन को लगातार एक सप्ताह से दौड़ाया जा रहा है। शुरुआत में खून की कमी के कारण दौड़ाया गया, जब मरीज को पर्याप्त खून चढ़ गया तो कभी पेशाब जांच तो कभी बच्चेदानी के भीतरी जांच और न जाने कितने जांच के नाम पर लगातार दौड़ाया जा रहा है। चिकित्सकों की यह लापरवाही पीड़िता महिला की जान पर बन गई है और हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही है। शासन- प्रशासन का कहना कि प्रत्येक मरीज को शासकीय अस्पताल में आवश्यक उपचार और उचित स्वास्थ्य देखभाल पाने का पूर्ण अधिकार है, किंतु इसके विपरीत जिला अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों की लापरवाही और अनदेखी के कारण बच्चेदानी की गंभीर बीमारी से ग्रसित एक पीड़िता आवश्यक उपचार के अभाव में एक सप्ताह से दर्द से बेहाल है। मरीज की चिकित्सीय परेशानी को लेकर सीएमएचओ सूर्यनारायण केसरी का भी ध्यानाकर्षण कराया जा चुका है, फिर भी भर्ती मरीज को त्वरित उपचार नही मिल पायी है। वहीं चिकित्सकों का कथन है कि महिला का ऑपरेशन करने में लगभग एक माह का समय लगेगा। जिम्मेदारों का यह गैर- जिम्मेदाराना रवैया मरीज के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती है और स्वास्थ्य प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाती है। मरीज के परिजन एक सप्ताह से इस चिकित्सालय का चक्कर लगा- लगाकर थक चुके है। परिजन ने त्वरित आवश्यक इलाज को लेकर कलेक्टर से अपेक्षित गुहार लगाई है। उनका कहना है कि इस दिशा पर जिला प्रशासन संज्ञान लेकर मरीज के तत्काल आवश्यक उपचार के निर्देश सवास्थ्य विभाग को देवें ताकि समय पर पीड़िता के बच्चेदानी का इलाज संभव हो सके।

Feb 24, 2026 - 18:23
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जिला चिकित्सालय की लापरवाही : बच्चेदानी की गंभीर बीमारी से तड़पती महिला की एक सप्ताह से अनदेखी, अस्पताल प्रबंधन व चिकित्सकों का गैर- जिम्मेदाराना रवैया

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